संसद में ‘जन विश्वास बिल 2026’ पेश: अब छोटी गलतियों पर जेल नहीं, सिर्फ लगेगा जुर्माना
मोदी सरकार का 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' पर बड़ा प्रहार; 78 कानूनों के 689 प्रावधानों से हटेगा आपराधिक ठप्पा।

नई दिल्ली/भोपाल:
केंद्र सरकार ने आज लोकसभा में जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक, 2026 पेश कर दिया है। वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद द्वारा पेश किए गए इस बिल का मुख्य उद्देश्य छोटे और तकनीकी अपराधों को ‘अपराध’ (Criminal Offence) की श्रेणी से बाहर करना है। इस कदम से न केवल अदालतों पर बोझ कम होगा, बल्कि व्यापारियों और आम नागरिकों को मामूली चूक के लिए जेल जाने के डर से मुक्ति मिलेगी।
क्या है इस बिल की मुख्य बातें?
संसद में पेश किए गए इस संशोधित विधेयक में कई महत्वपूर्ण बदलाव प्रस्तावित हैं:
- जेल की जगह जुर्माना: बिल के तहत लगभग 78 विभिन्न कानूनों (जैसे मोटर वाहन अधिनियम, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, और व्यापार से जुड़े कानून) में संशोधन किया जाएगा। अब तकनीकी खामियों या प्रक्रियात्मक गलतियों पर सजा नहीं, बल्कि आर्थिक दंड (Penalty) का प्रावधान होगा।
- पहली गलती पर रियायत: कई प्रावधानों में यह जोड़ा गया है कि पहली बार उल्लंघन करने पर केवल ‘चेतावनी’ या ‘एडवाइजरी’ दी जाएगी।
- जुर्माने में समयबद्ध वृद्धि: पारदर्शिता बनाए रखने के लिए, बिल में प्रावधान है कि हर तीन साल में निर्धारित जुर्माने की राशि में 10% की स्वतः वृद्धि की जाएगी।
- प्रशासनिक समाधान: अब छोटे मामलों के निपटारे के लिए बार-बार कोर्ट के चक्कर नहीं काटने होंगे। इसके लिए ‘एडजुडिकेटिंग ऑफिसर्स’ (Adjudicating Officers) नियुक्त किए जाएंगे जो प्रशासनिक स्तर पर ही मामलों का निपटारा करेंगे।
विपक्ष का रुख और सरकार का तर्क
जहाँ एक तरफ सरकार इसे “मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस” की दिशा में क्रांतिकारी कदम बता रही है, वहीं विपक्ष के कुछ सदस्यों ने इसे “प्रशासनिक मनमानी” करार देते हुए चिंता जताई है। हालांकि, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्ट किया कि इस बिल पर जेपीसी (Joint Parliamentary Committee) में व्यापक चर्चा हो चुकी है और इसके बाद ही इसे सदन में लाया गया है।
आम जनता और व्यापारियों पर असर
मध्य प्रदेश सहित देशभर के छोटे व्यापारियों के लिए यह बिल किसी बड़ी राहत से कम नहीं है। अक्सर देखा जाता था कि मामूली कागजी कार्यवाही या तकनीकी गलती के कारण व्यापारियों को कानूनी मुकदमों और जेल की धमकी का सामना करना पड़ता था, जिससे ‘भ्रष्टाचार’ को बढ़ावा मिलता था। अब जुर्माना स्पष्ट होने से इंस्पेक्टर राज पर लगाम लगेगी।
विशेष नोट: यह बिल 2023 के ‘जन विश्वास अधिनियम’ का अगला और अधिक विस्तृत संस्करण है, जिसमें अधिक कानूनों को कवर किया गया है।




