अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच पाकिस्तान की ‘ब्रोकर’ वाली भूमिका: क्या आरज़ू काज़मी की आशंकाएं सच होंगी?
सीज़फायर के ड्रामे के बीच पाकिस्तान की 'खतरनाक' चाल? जानें क्यों आरज़ू काज़मी ने पाकिस्तान को बताया सिर्फ एक 'ब्रोकर', डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के बीच फंसा इस्लामाबाद; '10 सूत्रीय' मांगें बनीं गले की फांस, क्या बातचीत से पहले ही टूट जाएगा समझौता?

नई दिल्ली:
मध्य पूर्व (Middle East) में जारी तनाव के बीच एक बड़ी खबर सामने आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के बीच दो हफ्ते के युद्धविराम (Ceasefire) की घोषणा की गई है, जिसमें पाकिस्तान ने मध्यस्थता (Mediation) का दावा किया है। हालांकि, वरिष्ठ पाकिस्तानी पत्रकार आरज़ू काज़मी के हालिया विश्लेषण ने इस पूरे घटनाक्रम पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
‘ब्रोकर’ बना पाकिस्तान: मजबूरी या कूटनीति?
आरज़ू काज़मी का कहना है कि अमेरिका ने पाकिस्तान का उपयोग केवल एक ‘ब्रोकर’ के तौर पर किया है ताकि ईरान के साथ संवाद का रास्ता खुल सके। काज़मी के मुताबिक:
- पाकिस्तान का काम सिर्फ दोनों पक्षों को एक मेज पर लाना है।
- इजरायल का कोई भी प्रतिनिधि (Delegation) पाकिस्तान नहीं आएगा, जो इस वार्ता की गंभीरता पर सवाल उठाता है।
- पाकिस्तान इस समय ‘वेंटिलेटर’ पर है और वह इस मध्यस्थता के जरिए अमेरिका से आर्थिक या कूटनीतिक मदद की उम्मीद कर रहा है।
ईरान की ’10 शर्तें’ और ट्रंप का ‘इनकार’
बातचीत के लिए ईरान ने 10 सूत्रीय प्रस्ताव रखा है, जिसे लेकर कूटनीतिक गलियारों में हलचल तेज है। ईरान की प्रमुख मांगें हैं:
- यूरेनियम संवर्धन का अधिकार बरकरार रहे।
- मिसाइल प्रोग्राम पर कोई बाहरी हस्तक्षेप न हो।
- युद्ध से हुए नुकसान के लिए अमेरिका से हर्जाना (Reparations)।
- ईरान पर लगे सभी प्राथमिक और माध्यमिक प्रतिबंधों को हटाना।
दूसरी ओर, डोनाल्ड ट्रंप ने इन शर्तों को मानने से फिलहाल इनकार कर दिया है। ट्रंप का कहना है कि वह ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म करना चाहते हैं।
पाकिस्तान की ‘गलती’ और लेबनान का भ्रम
ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक बड़ी चूक भी सामने आई है। बताया जा रहा है कि पाकिस्तान ने ईरान और अमेरिका को समझौते के अलग-अलग ‘वर्जन’ दिए। ईरान को लगा कि सीज़फायर में लेबनान (हिजबुल्लाह) भी शामिल है, जबकि अमेरिका और इजरायल ने इसे साफ तौर पर खारिज कर दिया। इस भ्रम के कारण सीज़फायर शुरू होने के कुछ ही घंटों भीतर फिर से हमले शुरू हो गए।
आज की बड़ी बैठक पर टिकी निगाहें
आज यानी 10 अप्रैल 2026 को इस्लामाबाद में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत प्रस्तावित है। लेकिन आरज़ू काज़मी का मानना है कि जब तक बुनियादी शर्तों पर सहमति नहीं बनती, यह बातचीत केवल एक ‘दिखावा’ साबित हो सकती है।
क्या पाकिस्तान खुद को इस वैश्विक संकट से निकाल पाएगा या यह ‘दोहरी चाल’ उस पर ही भारी पड़ेगी? टुडे इंडिया न्यूज एमपी इस खबर पर लगातार नजर बनाए हुए है।
विशेष विश्लेषण: आरज़ू काज़मी (पाकिस्तानी पत्रकार)




