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जमीनी स्तर पर सर्वे कर कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चों की पहचान सुनिश्चित करें : कलेक्टर जमुना भिड़े

जिला पोषण एवं जिला स्वास्थ्य समिति की संयुक्त बैठक में स्वास्थ्य-पोषण कार्यक्रमों की समीक्षा, 15 फरवरी तक 100 अति-कुपोषित बच्चों को एनआरसी में भर्ती कराने के निर्देश

निवाड़ी। कलेक्टर श्रीमती जमुना भिड़े की अध्यक्षता में बुधवार को जिला पोषण समिति एवं जिला स्वास्थ्य समिति की संयुक्त बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले में संचालित स्वास्थ्य एवं पोषण कार्यक्रमों की गहन समीक्षा की गई। कलेक्टर ने 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों की स्टेट रैंकिंग में सुधार लाने के निर्देश देते हुए संबंधित विभागों को समन्वय के साथ कार्य करने के लिए कहा।

कलेक्टर श्रीमती जमुना भिड़े ने पोषण ट्रैकर एप पर 0 से 6 वर्ष के बच्चों, गर्भवती एवं धात्री महिलाओं की जनसंख्या आधारित मैपिंग, एफआरएस, आभा आईडी एवं अपार आईडी निर्माण का कार्य एक सप्ताह के भीतर पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी गर्भवती महिलाओं के चिन्हांकन, हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की पहचान, पोषण पुनर्वास केंद्रों में शत-प्रतिशत बेड ऑक्युपेंसी सुनिश्चित करने तथा मुख्यमंत्री बाल आरोग्य संवर्धन कार्यक्रम अंतर्गत कुपोषित बच्चों के पूर्ण चिन्हांकन व नियमित फॉलो-अप पर विशेष जोर दिया।

स्वास्थ्य एवं पोषण स्तर में सुधार के लिए जिले में एक व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई है। इसके तहत दोनों विकासखंडों में विशेष स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया जाएगा, जहां महिलाओं एवं बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण के साथ-साथ गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों के उपचार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

कलेक्टर ने बताया कि जिले में ‘मिशन मोड’ में कार्य करते हुए आगामी 15 फरवरी तक 100 अति-कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में भर्ती कराना सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जमीनी स्तर पर सघन सर्वे कर ऐसे बच्चों की पहचान सुनिश्चित की जाए, ताकि उन्हें समय पर उचित चिकित्सीय देखरेख उपलब्ध कराई जा सके।

बैठक में यह भी बताया गया कि शिविरों के दौरान बच्चों को हाई-प्रोटीन युक्त विशेष पोषण किट वितरित की जाएगी। यह किट आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर होगी, जिससे बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और वजन में सुधार करने में मदद मिलेगी।

ब्लॉक स्तर पर महिलाओं की स्क्रीनिंग एवं सर्वे को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए दोनों ब्लॉकों में सघन सर्वे अभियान शुरू करने के निर्देश दिए गए। शिविरों में महिलाओं के स्वास्थ्य की जांच की जाएगी तथा सर्वे के माध्यम से एनीमिक एवं जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान कर उनका डेटाबेस तैयार किया जाएगा। साथ ही महिलाओं को पोषण एवं स्वच्छता के प्रति जागरूक भी किया जाएगा।

मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत रोहन सक्सेना ने स्वास्थ्य विभाग को टीकाकरण, एएनसी जांच, एनीमिया एवं हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं से संबंधित जानकारी नियमित रूप से साझा करने के निर्देश दिए।

बैठक में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत  रोहन सक्सेना, जिला कार्यक्रम अधिकारी, परियोजना अधिकारी, ब्लॉक समन्वयक एनएनएम, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, बीएमओ, समस्त मेडिकल ऑफिसर, बीपीएम सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

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