स्थापना दिवस विशेष: 2 सीटों से दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बनने तक का सफर, आज ही के दिन रखी गई थी भाजपा की नींव
शून्य से शिखर तक: 46 साल पहले दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान से शुरू हुआ था 'कमल' का सफर, जानें संस्थापक नायकों की गाथा

नई दिल्ली/भोपाल। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए आज, 6 अप्रैल का दिन गौरवशाली इतिहास और संकल्पों के पुनर्मिलन का प्रतीक है। आज से ठीक 46 वर्ष पूर्व, यानी 6 अप्रैल 1980 को दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में एक नए राजनीतिक दल का उदय हुआ था, जिसे आज हम दुनिया के सबसे बड़े राजनीतिक संगठन के रूप में जानते हैं।
जनसंघ के पुनर्जन्म के रूप में शुरू हुई यह यात्रा आज भारतीय राजनीति के केंद्र में है। एक समय जब लोकसभा में पार्टी के पास मात्र 2 सीटें थीं, उस दौर से लेकर पूर्ण बहुमत की सरकार तक का सफर संघर्ष, तपस्या और वैचारिक अडिगता की कहानी है।
अटल का वो ऐतिहासिक उद्घोष: “अंधेरा छंटेगा, सूरज निकलेगा, कमल खिलेगा”
पार्टी के प्रथम राष्ट्रीय अध्यक्ष अटल बिहारी वाजपेयी ने स्थापना के समय जो बीज बोया था, वह आज वटवृक्ष बन चुका है। अपने प्रथम अध्यक्षीय भाषण में उन्होंने भविष्य की ओर देखते हुए कहा था कि हम एक ऐसी नई पार्टी का निर्माण कर रहे हैं जो राष्ट्रवाद और अंत्योदय के प्रति समर्पित होगी। अटल जी न केवल पहले अध्यक्ष बने, बल्कि वे देश के पहले ऐसे गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री भी बने जिन्होंने अपना 5 साल का कार्यकाल सफलतापूर्वक पूरा किया।
नींव के पत्थर: वे 5 विभूतियाँ जिन्होंने गढ़ा ‘संगठन’
भाजपा की स्थापना में कई दिग्गजों का योगदान रहा, लेकिन इन 5 प्रमुख नामों ने पार्टी के वैचारिक और संगठनात्मक ढांचे की नींव रखी:
- अटल बिहारी वाजपेयी: पार्टी के वैचारिक मुखर स्वर और पहले अध्यक्ष।
- लालकृष्ण आडवाणी: संगठन को धार देने वाले और ‘रथ यात्रा’ के जरिए भाजपा को जन-जन तक पहुँचाने वाले नायक।
- मुरली मनोहर जोशी: पार्टी के वैचारिक अधिष्ठान को मजबूत करने वाले प्रमुख स्तंभ।
- राजमाता विजयाराजे सिंधिया: ग्वालियर राजघराने की इस विभूति ने पार्टी को विषम परिस्थितियों में संबल और ममतामयी नेतृत्व प्रदान किया।
- भैरों सिंह शेखावत: राजस्थान की माटी से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति में भाजपा के प्रभाव को स्थापित करने वाले जननेता।
भारतीय जनसंघ से भाजपा तक का सफर
भाजपा की जड़ें 1951 में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी द्वारा स्थापित भारतीय जनसंघ में निहित हैं। आपातकाल के बाद जनसंघ का विलय ‘जनता पार्टी’ में हुआ था, लेकिन ‘दोहरी सदस्यता’ के मुद्दे पर विवाद के बाद जनसंघ के नेताओं ने अलग होकर 6 अप्रैल 1980 को ‘भारतीय जनता पार्टी’ के नाम से नए दल का गठन किया। इसी दिन पार्टी के चुनाव चिह्न के रूप में ‘कमल’ को चुना गया, जो भारतीय संस्कृति और कीचड़ में खिलने वाली सादगी का प्रतीक है।
आज की भाजपा: विश्व का सबसे बड़ा राजनीतिक परिवार
- सदस्यता: आज भाजपा सदस्यता के मामले में चीन की कम्युनिस्ट पार्टी को पीछे छोड़कर दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी है।
- संसदीय शक्ति: 2 सीटों (1984) से शुरू हुआ सफर आज संसद में सबसे बड़ी शक्ति के रूप में स्थापित है।
- वैश्विक प्रभाव: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पार्टी ने न केवल चुनावी राजनीति बल्कि जन-कल्याणकारी योजनाओं के जरिए देश के कोने-कोने में अपनी पैठ बनाई है।
आज मध्य प्रदेश सहित पूरे देश में भाजपा कार्यकर्ता इस दिन को ‘सेवा सप्ताह’ और उत्सव के रूप में मना रहे हैं, अपने उन पूर्वजों को याद करते हुए जिन्होंने शून्य से इस सफर की शुरुआत की थी।
रिपोर्ट: Today India News MP डेस्क
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