जल सहेलियों ने घुरारी नदी पर किया श्रमदान, बोरी बंधान से बढ़ाया जल प्रवाह
जल संरक्षण के लिए ग्रामीणों को किया जागरूक, नदी को अविरल-निर्मल रखने का लिया संकल्प

निवाड़ी। घुरारी नदी के संरक्षण और जल प्रवाह बढ़ाने के उद्देश्य से आज जल सहेलियों द्वारा नदी तट पर सामूहिक श्रमदान किया गया। इस दौरान नदी में बोरी बंधान कर जल संरक्षण का कार्य किया गया। जल सहेलियों ने संकल्प लिया कि घुरारी नदी को भविष्य में भी अविरल एवं निर्मल बनाए रखने हेतु निरंतर प्रयास जारी रहेंगे। उन्होंने कहा कि नदियों की स्वच्छता और सतत प्रवाह समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए परमार्थ संस्था की कार्यक्रम प्रबंधक शिवानी ने कहा कि नदियाँ केवल जल का स्रोत नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और पर्यावरणीय आत्मा हैं। उन्होंने बताया कि जल जीवन मिशन के बाद और आने वाले समय में देश के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए नदियों में सतत जल प्रवाह बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।

शिवानी ने जलवायु परिवर्तन की चुनौती का उल्लेख करते हुए कहा कि बढ़ते तापमान और बदलते जलवायु परिदृश्य के बीच नदियों का संरक्षण और उनमें निरंतर जल प्रवाह बनाए रखना और भी महत्वपूर्ण हो गया है। नदियाँ न केवल जल उपलब्ध कराती हैं, बल्कि भू-जल स्तर बनाए रखने और पर्यावरणीय संतुलन कायम रखने में भी अहम भूमिका निभाती हैं।

इस अवसर पर जल सहेलियों ने गीत गाते हुए श्रमदान किया और लोगों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक किया। उन्होंने बताया कि बुंदेलखंड क्षेत्र में घुरारी नदी जैसी कई छोटी नदियाँ हैं, जिनके संरक्षण के लिए जल सहेलियाँ लगातार प्रयासरत हैं। जल सहेलियों ने चिंता जताई कि कुछ लालची तत्व अतिक्रमण कर नदियों को नुकसान पहुँचा रहे हैं, जिनके विरुद्ध सरकार को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
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कार्यक्रम में जल सहेली रेखा, मंजुलता, लक्ष्मी, छाया सहित अन्य जल सहेलियाँ उपस्थित रहीं।




