सियासी हलचल: अपनी ही सरकार से ‘मंत्री जी’ की नाराजगी! मुख्यमंत्री के आने से पहले ही कार्यक्रम छोड़ हुए रवाना
ब्यूरोक्रेसी बनाम सियासत: प्रोटोकॉल में अनदेखी से बिफरे मंत्री, बीच में छोड़ा सरकारी कार्यक्रम; गलियारों में चर्चा तेज।

भोपाल/जबलपुर:
मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। एक तरफ मुख्यमंत्री प्रदेश के विकास को रफ्तार देने में जुटे हैं, तो दूसरी तरफ उनकी कैबिनेट के ही कद्दावर मंत्रियों और नौकरशाही के बीच ‘कोल्ड वॉर’ की खबरें सामने आ रही हैं। ताजा मामला एक सरकारी कार्यक्रम का है, जहाँ मुख्यमंत्री के पहुँचने से ठीक पहले एक वरिष्ठ मंत्री की नाराजगी ने सियासी पारे को गरमा दिया है।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, जिले में आयोजित एक महत्वपूर्ण विकास कार्यों के लोकार्पण और शिलान्यास कार्यक्रम में मुख्यमंत्री का आगमन होना था। तय प्रोटोकॉल के तहत मंत्री जी कार्यक्रम स्थल पर पहुँच भी गए थे, लेकिन बताया जा रहा है कि प्रशासनिक अधिकारियों के व्यवहार और व्यवस्थाओं में हुई अनदेखी से वे इस कदर नाराज हुए कि मुख्यमंत्री के आने का इंतजार किए बिना ही वहां से रवाना हो गए।
अफसरशाही पर उठ रहे सवाल
सूत्रों का कहना है कि मंत्री जी अपनी ही सरकार के कुछ प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली से लंबे समय से असंतुष्ट हैं। हालिया घटनाक्रम में अधिकारियों द्वारा प्रोटोकॉल का पालन न करना और स्थानीय मुद्दों पर मंत्री की सलाह को दरकिनार करना नाराजगी की मुख्य वजह मानी जा रही है।
“जब निर्वाचित प्रतिनिधियों की ही सुनवाई नहीं होगी, तो जनता की उम्मीदों का क्या होगा? यह लड़ाई व्यक्तिगत नहीं, बल्कि व्यवस्था की है।” – मंत्री खेमे के करीबी सूत्र
विपक्ष को मिला मौका
इस घटना ने विपक्षी दल कांग्रेस को सरकार पर हमला करने का एक और मौका दे दिया है। विपक्ष का आरोप है कि प्रदेश में ‘अफसरशाही’ बेलगाम हो चुकी है और मुख्यमंत्री का अपने ही मंत्रियों पर नियंत्रण नहीं रह गया है।
आगे क्या?
फिलहाल, इस मामले में संगठन और सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते मंत्रियों और ब्यूरोक्रेसी के बीच का यह तालमेल नहीं सुधरा, तो आने वाले समय में सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।
ब्यूरो रिपोर्ट, टुडे इंडिया न्यूज़, मध्य प्रदेश।




