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​पेपर लीक माफिया की अब खैर नहीं: केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में पेश किया सख्त ‘एंटी-पेपर लीक संशोधित विधेयक’

​10 साल तक की जेल, 10 करोड़ तक का भारी जुर्माना और फास्ट-ट्रैक कोर्ट में होगी सुनवाई; आम अभ्यर्थियों को मिली पूरी सुरक्षा।

टुडे इंडिया न्यूज एमपी (Today India News MP)

​मुख्य समाचार

​नई दिल्ली / भोपाल:

प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता और पवित्रता बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार ने संसद में कड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण राज्य मंत्री (DoPT) डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक’ (Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill) पेश किया।

​इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य देश में आयोजित होने वाली विभिन्न प्रतियोगी व सार्वजनिक परीक्षाओं (जैसे UPSC, SSC, बैंकिंग, रेलवे और NTA) में पेपर लीक, धांधली और संगठित गिरोहों पर नकेल कसना है।

​विधेयक की मुख्य बातें एवं कड़े प्रावधान:

  • ​संगठित गिरोहों पर शिकंजा: पेपर लीक या परीक्षा में गड़बड़ी कराने वाले संगठित सिंडिकेट के दोषियों के लिए न्यूनतम 7 साल से लेकर 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
  • ​फास्ट-ट्रैक सुनवाई: हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में ऐसे मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट का गठन होगा।
  • ​समयबद्ध जांच: किसी भी पेपर लीक मामले की जांच 2 महीने के भीतर पूरी करनी होगी और चार्जशीट दाखिल होने के 3 महीने में ट्रायल समाप्त करना होगा।
  • ​संपत्ति की जब्ती: गड़बड़ी में शामिल संस्थानों और माफियाओं की संपत्तियों को कुर्क और जब्त किया जा सकेगा।
  • ​छात्रों के हितों की रक्षा: विधेयक में निर्दोष अभ्यर्थियों और पढ़ाई करने वाले आम छात्रों के हितों का विशेष ध्यान रखा गया है। परीक्षार्थियों को इन दंडात्मक आपराधिक धाराओं से बाहर रखा गया है, ताकि ईमानदारी से परीक्षा देने वाले युवाओं पर कोई बेवजह कानूनी दबाव न पड़े।

​सरकार का संदेश:

“युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। यह कानून परीक्षाओं में शत-प्रतिशत पारदर्शिता और सुचिता सुनिश्चित करेगा।”

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