पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले BJP का बड़ा दांव: तपस रॉय को बनाया राज्य उपाध्यक्ष
विधानसभा चुनाव 2026 से तीन महीने पहले संगठन में बड़ा फेरबदल, TMC के गढ़ में सेंध की रणनीति


पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से ठीक तीन महीने पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने राज्य की राजनीति में बड़ा और सोचा-समझा कदम उठाया है। पार्टी ने नई राज्य समिति का ऐलान करते हुए तृणमूल कांग्रेस (TMC) से आए तपस रॉय को राज्य उपाध्यक्ष नियुक्त कर स्पष्ट संकेत दे दिया है कि भाजपा अब केवल वैचारिक संघर्ष नहीं, बल्कि सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों के साथ चुनावी मैदान में उतरने जा रही है।
तपस रॉय का राजनीतिक आधार शहरी बंगाल, विशेषकर कोलकाता और आसपास के क्षेत्रों में रहा है। वे लंबे समय तक TMC का चेहरा रहे हैं और ममता बनर्जी के करीबी नेताओं में गिने जाते थे। ऐसे में उनका भाजपा में ऊंचा पद पाना यह दर्शाता है कि पार्टी TMC के पारंपरिक वोट बैंक में सीधी सेंध लगाने की रणनीति पर काम कर रही है।

BJP की रणनीति के अहम संकेत
TMC तोड़ो नीति:
तपस रॉय को राज्य उपाध्यक्ष बनाकर भाजपा ने यह संदेश दिया है कि वह TMC के असंतुष्ट नेताओं को न सिर्फ़ जगह दे रही है, बल्कि उन्हें निर्णायक भूमिकाएं भी सौंप रही है।
शहरी और मध्यम वर्ग पर फोकस:
तपस रॉय की पहचान एक शहरी, संगठित और प्रशासनिक समझ रखने वाले नेता की है। भाजपा उन्हें आगे कर शहरी मतदाताओं और मध्यम वर्ग को साधने की कोशिश कर रही है।
चुनाव से पहले संगठनात्मक मजबूती:
चुनाव से ठीक पहले राज्य समिति का पुनर्गठन यह दर्शाता है कि भाजपा अब मैदानी स्तर पर आक्रामक अभियान की तैयारी में है।

TMC के लिए बढ़ी चुनौती
तपस रॉय की नियुक्ति TMC के लिए दोहरी चुनौती है—
एक तरफ़ अंदरूनी असंतोष को उजागर करती है
दूसरी ओर यह संकेत देती है कि भाजपा अब सिर्फ़ बाहरी विपक्ष नहीं, बल्कि TMC के भीतर से निकले चेहरों के सहारे ममता बनर्जी को घेरने की रणनीति बना रही है।
तपस रॉय को राज्य उपाध्यक्ष बनाना भाजपा का महज़ संगठनात्मक फैसला नहीं, बल्कि एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश है। भाजपा यह दिखाना चाहती है कि वह 2026 में पश्चिम बंगाल की सत्ता की लड़ाई को पूरी ताक़त और नए समीकरणों के साथ लड़ने के मूड में है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या यह रणनीतिक दांव भाजपा को चुनावी बढ़त दिला पाता है या नहीं।




