बदलता दौर: मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट का बड़ा दावा, आने वाले वर्षों में विश्व की 45% महिलाएं रह सकती हैं अविवाहित
करियर, उच्च शिक्षा और वित्तीय स्वतंत्रता को प्राथमिकता दे रही हैं आधुनिक महिलाएं; वैश्विक स्तर पर पारंपरिक वैवाहिक और पारिवारिक ढांचे में आ रहा है ऐतिहासिक बदलाव।

भोपाल/ग्लोबल डेस्क (टुडे इंडिया न्यूज एमपी):
वैश्विक स्तर पर समाज की बदलती सोच और प्राथमिकताओं को लेकर एक बड़ा सर्वे सामने आया है। प्रतिष्ठित वित्तीय सेवा संस्थान ‘मॉर्गन स्टेनली’ (Morgan Stanley) की ‘द शी-इकॉनमी’ (The SHEconomy) रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले वर्षों में 25 से 44 वर्ष की प्राइम वर्किंग-एज (Prime working-age) की लगभग 45 प्रतिशत महिलाएं अविवाहित और बच्चों की जिम्मेदारी से दूर रहने का विकल्प चुन सकती हैं। विश्लेषकों का मानना है कि आधुनिक इतिहास में यह अपनी तरह का सबसे बड़ा बदलाव होगा, जहां महिलाएं पारंपरिक जीवनशैली से हटकर स्वतंत्र रास्ता अपना रही हैं।
पारंपरिक बंधनों से मुक्ति और व्यक्तिगत प्राथमिकताएं
इस अंतरराष्ट्रीय सर्वे में रेखांकित किया गया है कि आज की महिलाएं विवाह और मातृत्व को जीवन की अनिवार्य परिणति मानने के बजाय अपने व्यक्तिगत विकास को आगे रख रही हैं। रिपोर्ट के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- आर्थिक आत्मनिर्भरता: आधुनिक महिलाएं शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। वित्तीय रूप से स्वतंत्र होने के कारण अब उन्हें जीवनयापन के लिए किसी वैवाहिक समझौते पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।
- सामाजिक दबाव से दूरी: महिलाएं अब समाज के दबे-छिपे दबावों या तयशुदा ‘जैविक समय-सारणी’ (biological clock) के अनुसार जीने के बजाय अपनी शर्तों पर जीवन बिताना पसंद कर रही हैं।
- मानसिक शांति और करियर ग्रोथ: अधिकांश कामकाजी महिलाओं के लिए करियर में तरक्की, मानसिक सुकून और अपनी पसंद की जीवनशैली अपनाना पारिवारिक जिम्मेदारियों से अधिक महत्वपूर्ण बनता जा रहा है।
अर्थव्यवस्था और बाजार पर पड़ेगा दूरगामी असर
विशेषज्ञों का मानना है कि एकल (Single) और स्वतंत्र महिलाओं की बढ़ती संख्या का असर केवल समाज तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा भी तय करेगा। स्वतंत्र कामकाजी महिलाओं की बढ़ती क्रय शक्ति (Purchasing Power) रियल एस्टेट, ऑटोमोबाइल, लग्जरी और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में नए रुझान पैदा कर रही है। इसके साथ ही, कॉर्पोरेट जगत और सरकारों को भी कार्यस्थलों पर महिलाओं के अनुकूल नीतियां, बेहतर वेतन समानता और लचीले कामकाजी घंटे (Flexible work hours) लागू करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
यह वैश्विक प्रवृत्ति इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में परिवार और समाज की पारंपरिक परिभाषाएं नए रूपों में ढलती हुई नजर आएंगी।




