शहडोल: हीराकुंड एक्सप्रेस में नशे की ‘सवारी’, रेलवे स्टाफ ही निकले गांजा तस्कर; GRP ने किया बड़ा खुलासा

शहडोल। मध्यप्रदेश के शहडोल में नशे के सौदागरों के खिलाफ पुलिस की सख्ती के बाद अब तस्करी के नए और चौंकाने वाले तरीके सामने आ रहे हैं। सड़क मार्ग पर पुलिस की पैनी नजर और नाकेबंदी से बचने के लिए तस्करों ने अब ट्रेनों को अपना सुरक्षित ठिकाना बनाना शुरू कर दिया है। हालांकि, शहडोल जीआरपी (GRP) की सतर्कता ने तस्करी के इस बड़े खेल का पर्दाफाश कर दिया है।
चेकिंग के दौरान पकड़े गए ‘खास’ तस्कर
जीआरपी पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि हीराकुंड एक्सप्रेस के जरिए मादक पदार्थों की एक बड़ी खेप ले जाई जा रही है। पुलिस ने तत्काल टीम गठित कर शहडोल रेलवे स्टेशन पर घेराबंदी की। जब संदिग्धों की तलाशी ली गई, तो पुलिस के होश उड़ गए। पकड़े गए आरोपी कोई बाहरी व्यक्ति नहीं, बल्कि ट्रेन के संचालन से जुड़े कर्मचारी ही निकले।
स्टाफ की आड़ में चल रहा था काला कारोबार
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान मृणाल कांत महतो (निवासी पश्चिम बंगाल) और दीपेश महतो (निवासी झारखंड) के रूप में हुई है।
- मृणाल कांत महतो: ट्रेन में सुपरवाइजर के पद पर तैनात था।
- दीपेश महतो: ट्रेन में बेडरोल अटेंडर का काम करता था।
इन दोनों ने अपने पद और रेलवे पास का फायदा उठाकर बड़ी चालाकी से तस्करी का नेटवर्क फैला रखा था। पुलिस ने इनके पास से 10 किलो से ज्यादा अवैध गांजा बरामद किया है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग 2 लाख रुपए आंकी जा रही है।
नेटवर्क खंगाल रही है पुलिस
प्रारंभिक पूछताछ में यह बात सामने आई है कि ये आरोपी लंबे समय से ट्रेन की आड़ में इस अवैध कारोबार को अंजाम दे रहे थे। जीआरपी अब इस बात की जांच कर रही है कि यह गांजा कहां से लाया गया था और इसकी सप्लाई शहडोल के अलावा और किन-किन शहरों में होनी थी। पुलिस को अंदेशा है कि इस गिरोह में रेलवे के कुछ अन्य कर्मचारी या बाहरी बड़े तस्कर भी शामिल हो सकते हैं।




