NCP-SP और DMK विपक्ष का खेमा न छोड़ें: कांग्रेस की बड़ी अपील; सुप्रिया सुले के ‘परिसीमन’ बयान ने बढ़ाई सियासी हलचल
पी. चिदंबरम ने बीजेपी पर विपक्षी दलों को तोड़ने का लगाया आरोप, सुप्रिया सुले के बयान के बाद 'इंडिया' गठबंधन में बढ़ीं धड़कनें।

नई दिल्ली/मुंबई:
विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ (INDIA Alliance) के भीतर एक बार फिर बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद चंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले के एक हालिया बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। इसके तुरंत बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने एनसीपी (एसपी) और दक्षिण भारत की प्रमुख पार्टी डीएमके (DMK) से विपक्षी एकजुटता बनाए रखने की बड़ी अपील की है।
सुप्रिया सुले के किस बयान ने मचाई हलचल?
हाल ही में सुप्रिया सुले ने संसद के परिसीमन (Delimitation) कानून को लेकर एक बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि यदि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार का नया परिसीमन कानून देश के हर राज्य में लोकसभा सीटों में एक समान 50% बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखता है, तो विपक्ष के पास इसका विरोध करने का कोई खास कारण नहीं होगा।
सुप्रिया सुले की इस टिप्पणी को राजनीतिक विश्लेषक बीजेपी के प्रति उनके रुख में नरमी के रूप में देख रहे हैं। इसके बाद से ही शरद पवार की अगुवाई वाली एनसीपी के एनडीए के करीब आने की अटकलें तेज हो गई हैं।
कांग्रेस की ओर से पी. चिदंबरम ने दी चेतावनी
सुप्रिया सुले के इस बयान के बाद कांग्रेस पूरी तरह से सतर्क हो गई है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने विपक्षी खेमे में फूट की आशंका जताई है।
चिदंबरम ने सोशल मीडिया पर अपनी बात रखते हुए बीजेपी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) में फूट डालने की कोशिशों के बाद, अब खबरें आ रही हैं कि बीजेपी एनसीपी (शरद पवार) और डीएमके को अपने पाले में लाने की कोशिश कर रही है। उनका मानना है कि बीजेपी इस बिल के नए वर्शन को संसद से पास कराने के लिए जरूरी वोट जुटाने में लगी है।
”एनसीपी (शरद पवार) और डीएमके दोनों ही दल इस बिल के पीछे छिपे असली मकसद को अच्छी तरह समझते हैं। मुझे पूरी उम्मीद है कि वे भविष्य में भी अपनी पुरानी बात पर अडिग रहेंगी। अगर इनमें से कोई भी दल बीजेपी के इस प्रस्ताव का समर्थन करता है, तो यह उनकी अपनी अंतरात्मा के साथ बड़ा धोखा होगा।”
— पी. चिदंबरम, वरिष्ठ कांग्रेस नेता
क्या है ‘परिसीमन’ का पूरा विवाद?
परिसीमन का सीधा मतलब है देश में जनसंख्या के आधार पर लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं का नए सिरे से निर्धारण करना।
- दक्षिण भारत की चिंता: तमिलनाडु (जहां डीएमके सत्ता में है) समेत तमाम दक्षिण भारतीय राज्यों का तर्क है कि उन्होंने पिछले दशकों में जनसंख्या नियंत्रण नीतियों को बहुत ही बेहतरीन तरीके से लागू किया है।
- सीटों का नुकसान: यदि नए परिसीमन में सिर्फ जनसंख्या को आधार बनाया गया, तो अधिक जनसंख्या वाले उत्तर और मध्य भारतीय राज्यों की सीटें बहुत ज्यादा बढ़ जाएंगी, जबकि जनसंख्या नियंत्रित करने वाले दक्षिणी राज्यों की हिस्सेदारी कम हो जाएगी।
- कांग्रेस का रुख: कांग्रेस इसी आधार पर इस परिसीमन योजना को गैर-वाजिब बता रही है और इसे संघीय ढांचे के खिलाफ मानती है।
क्या ‘इंडिया’ गठबंधन में आ जाएगी दरार?
फिलहाल सुप्रिया सुले की पार्टी ने एनडीए में जाने या किसी भी तरह के समझौते की खबरों को सिरे से खारिज किया है, लेकिन उनके इस बयान ने कांग्रेस के माथे पर चिंता की लकीरें जरूर खींच दी हैं। संसद के आगामी सत्रों में इस परिसीमन बिल को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच शह-मात का खेल और भी दिलचस्प होने की उम्मीद है।




