अयोध्या के बाद अब मथुरा की बारी! श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति के लिए 9 अगस्त को ‘कारसेवा’ का बड़ा ऐलान, अखाड़ा परिषद ने तैयार किया महा-प्लान
महंत रविंद्र पुरी के आह्वान पर एकजुट हुए देश के 13 अखाड़े; दिल्ली से मथुरा तक संतों के कूच की तैयारी, शाही ईदगाह कमेटी ने जताई कड़ी आपत्ति।

टुडे इंडिया न्यूज़ एमपी (Today India News MP) — विशेष रिपोर्टर
मथुरा/हरिद्वार। अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण के बाद अब श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन ने एक नया और बेहद आक्रामक मोड़ ले लिया है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी ने एक अभूतपूर्व घोषणा करते हुए 9 अगस्त (क्रांति दिवस) को मथुरा में कारसेवा करने का खुला आह्वान किया है। इस बड़े ऐलान के बाद सनातन धर्म के साधु-संतों और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
वरिष्ठ पत्रकार मारिया शकील की एक विशेष रिपोर्ट के मुताबिक, अखाड़ा परिषद के इस फैसले ने देश के धार्मिक और सामाजिक विमर्श को पूरी तरह से गरमा दिया है। इस महा-प्लान के तहत देश भर के 13 अखाड़ों से जुड़े लाखों साधु-संत, सन्यासी और नागा बाबा 9 अगस्त को मथुरा की ओर कूच करने की तैयारी में हैं।
कारसेवा का क्या है पूरा प्लान?
संतों और अखाड़ा परिषद की ओर से तैयार की गई रणनीति के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- दिल्ली से मथुरा पैदल मार्च: योजना के मुताबिक, बड़ी संख्या में साधु-संत दिल्ली से मथुरा के लिए पैदल मार्च (कूच) करेंगे।
- भजन-कीर्तन और श्रमदान: मथुरा पहुंचने के बाद मंदिर परिसर के बाहर बड़े पैमाने पर भजन-कीर्तन, हनुमान चालीसा पाठ और धार्मिक अनुष्ठान किए जाएंगे।
- गांव-गांव में जन-जागरण: चित्रगुप्त पीठ के पीठाधीश्वर स्वामी सच्चिदानंद महाराज और प्रख्यात कथावाचक ठाकुर देवकीनंदन महाराज जैसे प्रमुख संत गांव-गांव जाकर ब्रजवासियों और सनातन प्रेमियों को इस कारसेवा से जोड़ने के लिए जनसमर्थन जुटा रहे हैं।
- प्रतीकात्मक भोग और संकल्प: कारसेवा के दिन भगवान श्रीकृष्ण को माखन-मिश्री का विशेष भोग लगाकर भव्य और दिव्य मंदिर निर्माण का संकल्प दोहराया जाएगा।
मुस्लिम पक्ष और विपक्षी खेमे में हलचल
अखाड़ा परिषद के इस ऐलान के बाद मुस्लिम पक्ष की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है।
शाही ईदगाह मस्जिद कमेटी के सचिव तनवीर अहमद का बयान:
“जब यह पूरा मामला पहले से ही माननीय न्यायालय में लंबित है, तो इस तरह की कारसेवा की बयानबाजी और संतों का यह कदम उचित नहीं है। हमें संविधान और न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। मथुरा का मामला अयोध्या से अलग है, यहां मंदिर और मस्जिद दोनों के रास्ते अलग हैं और दोनों आपसी भाईचारे के प्रतीक हैं।”
इसके साथ ही, राजनीतिक मंचों पर भी इस मुद्दे को लेकर तीखी बहस शुरू हो गई है, जहां उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयानों और विपक्षी दलों के पलटवार के बाद जुबानी जंग तेज हो गई है।
अखाड़ा परिषद का रुख: “अब नहीं तो कब?”
अखाड़ा परिषद के संतों का साफ कहना है कि कारसेवा का उद्देश्य कानून को हाथ में लेना या अदालत पर दबाव बनाना नहीं, बल्कि हिंदू समाज को अपनी धार्मिक मान्यताओं और आस्था के प्रति जागरूक करना है। संतों का दृढ़ विश्वास है कि यदि अयोध्या विवाद का न्यायिक और शांतिपूर्ण समाधान निकल सकता है, तो मथुरा और काशी में भी भव्य मंदिर का निर्माण होकर रहेगा।
फिलहाल, इस बड़े ऐलान के बाद खुफिया एजेंसियां और स्थानीय प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था व कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गए हैं।
(टुडे इंडिया न्यूज़ एमपी के लिए विशेष ब्यूरो रिपोर्ट)




