गंभीर स्थिति वाली गर्भवती महिलाओं की स्क्रीनिंग कर अस्पताल में ही उपचार किया जाए : कलेक्टर जमुना भिड़े
स्वास्थ्य सेवाओं एवं पोषण कार्यक्रमों की संयुक्त समीक्षा बैठक में अधिकारियों को कड़े निर्देश, एक सप्ताह में 100% लक्ष्य पूरा करने की चेतावनी

निवाड़ी,पृथ्वीपुर।
कलेक्टर श्रीमती जमुना भिड़े की अध्यक्षता में आज जनपद पंचायत सभागार पृथ्वीपुर में स्वास्थ्य सेवाओं एवं पोषण कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर एक महत्वपूर्ण संयुक्त समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा मैदानी अमले की कार्यप्रणाली की विस्तार से समीक्षा की गई।

बैठक में एसडीएम पृथ्वीपुर अशोक कुमार सेन, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल झमनानी, बीएमओ डॉ. गजेन्द्र निरंजन, प्रभारी डीपीएम नितिन तिवारी, सीएचओ, आशा कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सहित संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
3 से 14 फरवरी तक गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य शिविर
कलेक्टर श्रीमती भिड़े ने निर्देश दिए कि जिले की सभी पंचायतों में 3 से 14 फरवरी तक विशेष स्वास्थ्य शिविर आयोजित कर गर्भवती महिलाओं की जांच सुनिश्चित की जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि गंभीर स्थिति वाली गर्भवती महिलाओं की अनिवार्य स्क्रीनिंग कर अस्पताल में ही उपचार किया जाए, ताकि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को प्रभावी रूप से कम किया जा सके।

कुपोषित बच्चों पर विशेष फोकस
बैठक में कलेक्टर ने निर्देश दिए कि कुपोषित बच्चों को चिन्हित कर एनआरसी (पोषण पुनर्वास केंद्र) में भर्ती कराया जाए। चयनित बच्चों को पोषण आहार किट का वितरण सुनिश्चित किया जाए। साथ ही 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों का आंगनवाड़ी केंद्रों में 100 प्रतिशत पंजीयन अनिवार्य रूप से कराया जाए।

SAM बच्चों के उपचार और साप्ताहिक फॉलोअप के निर्देश
कलेक्टर ने कहा कि प्रत्येक माह टीकाकरण के दौरान चिन्हित किए गए SAM बच्चों को स्वास्थ्य विभाग द्वारा एमोक्सीसिलिन दवा उपलब्ध कराई जाए। इसकी पोषण ट्रैकर एप पर अनिवार्य एंट्री कराते हुए हर सप्ताह फॉलोअप सुनिश्चित किया जाए।

टीबी मरीजों की सघन स्क्रीनिंग
उन्होंने जिले में टीबी मरीजों की सघन स्क्रीनिंग और जांच के निर्देश देते हुए कहा कि कोई भी पात्र व्यक्ति जांच से वंचित न रहे।
लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी
कलेक्टर श्रीमती जमुना भिड़े ने अधिकारियों से संवाद करते हुए कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि

यदि सभी स्वास्थ्य एवं पोषण कार्यक्रमों की उपलब्धता एक सप्ताह के भीतर शत-प्रतिशत पूर्ण नहीं होती, तो संबंधित अधिकारी/कर्मचारी के विरुद्ध एक वेतन वृद्धि रोकने सहित अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी।



