राज्यसभा में पीएम मोदी का कांग्रेस पर अब तक का सबसे तीखा हमला
लोकतंत्र, वंशवाद और संस्थाओं पर अविश्वास को लेकर विपक्ष को घेरा

नई दिल्ली: राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ताज़ा संबोधन भारतीय संसदीय इतिहास के सबसे आक्रामक और राजनीतिक रूप से निर्णायक भाषणों में गिना जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर सीधा हमला बोलते हुए उसे लोकतंत्र को कमजोर करने, संवैधानिक संस्थाओं पर अविश्वास फैलाने और वंशवादी राजनीति को बढ़ावा देने का दोषी ठहराया।
प्रधानमंत्री का यह भाषण न केवल सदन में, बल्कि देश की राजनीति में भी लंबे समय तक गूंजने वाला माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह कांग्रेस के खिलाफ अब तक का सबसे स्पष्ट और तीखा हमला है।

🔎 “हार तय दिखती है तो संस्थाओं पर हमला होता है” – पीएम मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्ष की रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस ने हमेशा अपनी राजनीतिक विफलताओं को छिपाने के लिए संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाया है।
उन्होंने कहा,
“जब चुनाव हारते हैं तो चुनाव आयोग पर सवाल उठते हैं,
जब फैसला पसंद नहीं आता तो न्यायपालिका को कटघरे में खड़ा किया जाता है।”
पीएम ने इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक प्रवृत्ति बताते हुए कहा कि संस्थाओं पर विश्वास ही किसी भी लोकतंत्र की रीढ़ होता है, लेकिन कांग्रेस ने बार-बार इस भरोसे को कमजोर किया है।
🕰️ आपातकाल का जिक्र, कांग्रेस के अतीत पर सीधा प्रहार
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में आपातकाल का उल्लेख करते हुए कांग्रेस को उसके इतिहास की याद दिलाई।
उन्होंने कहा कि आज संविधान की दुहाई देने वाली पार्टी वही है जिसने देश पर आपातकाल थोपकर मौलिक अधिकार छीन लिए थे।
“लोकतंत्र की हत्या करने वाली पार्टी आज संविधान की रक्षा का प्रमाण पत्र बांट रही है।”
इस टिप्पणी के बाद सदन में सत्ता पक्ष के सांसदों ने जोरदार समर्थन जताया, जबकि कांग्रेस सांसदों ने तीखी आपत्ति दर्ज कराई।

👪 वंशवाद पर सबसे बड़ा हमला
प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस की राजनीति को “एक परिवार की सत्ता” तक सीमित बताते हुए कहा कि इस सोच ने देश की अपार प्रतिभाओं को दशकों तक पीछे धकेल दिया।
उन्होंने कहा,
“जब लोकतंत्र में पद विरासत बन जाए, तो योग्यता की हत्या होती है।”
पीएम ने दावा किया कि उनकी सरकार ने वंशवाद की राजनीति को चुनौती दी है और आज देश योग्यता, परिश्रम और पारदर्शिता के आधार पर आगे बढ़ रहा है।

📌 तुष्टिकरण बनाम विकास की राजनीति
प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि समाज को बांटकर वोट लेने की नीति ने देश को कमजोर किया।
पीएम मोदी के अनुसार,
कांग्रेस ने वोट बैंक को प्राथमिकता दी
उनकी सरकार ने विकास को केंद्र में रखा
उन्होंने दोहराया कि उनकी सरकार की नीति “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास” पर आधारित है।

🏗️ “नई राजनीति, नई कार्यसंस्कृति”
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारत नई राजनीतिक संस्कृति की ओर बढ़ रहा है, जहां सरकारें जवाबदेह हैं और फैसले जनता के हित में लिए जाते हैं।
उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने
गरीबों के लिए आवास
किसानों के लिए योजनाएं
महिलाओं के लिए सुरक्षा और सम्मान
युवाओं के लिए अवसर
को प्राथमिकता दी है, जबकि कांग्रेस केवल सत्ता केंद्रित राजनीति करती रही।

⚡ सदन में हंगामा, विपक्ष का विरोध
प्रधानमंत्री के इस आक्रामक भाषण के दौरान राज्यसभा का माहौल कई बार गर्माया। कांग्रेस सांसदों ने आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया और कहा कि प्रधानमंत्री सदन का उपयोग विपक्ष को निशाना बनाने के लिए कर रहे हैं।
कांग्रेस की ओर से कहा गया कि सरकार असली मुद्दों—महंगाई, बेरोजगारी और सामाजिक तनाव—से ध्यान भटका रही है।
📊 राजनीतिक मायने क्या हैं?
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री का यह भाषण केवल संसद के लिए नहीं, बल्कि सीधे जनता के लिए संदेश है।
विश्लेषकों के अनुसार:
कांग्रेस को उसके अतीत से जोड़कर घेरने की रणनीति
भाजपा की “नए भारत बनाम पुरानी राजनीति” की लाइन
आगामी राजनीतिक लड़ाइयों की भूमिका
—इस भाषण में साफ दिखाई देती है।
📝 निष्कर्ष
राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह संबोधन कांग्रेस के खिलाफ अब तक का सबसे तीखा, सीधा और राजनीतिक रूप से प्रभावशाली हमला माना जा रहा है।
लोकतंत्र, वंशवाद, संस्थाएं और तुष्टिकरण जैसे मुद्दों पर दिए गए बयान आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस का केंद्र बने रहेंगे।
यह भाषण न सिर्फ संसद की कार्यवाही का हिस्सा है, बल्कि देश की राजनीति की दिशा तय करने वाला वक्तव्य भी माना जा रहा है।




