होलिका दहन और चंद्र ग्रहण साथ-साथ: भद्रा, सूतक और मुहूर्त को लेकर विशेष निर्देश जारी
2 मार्च की रात भद्रा बाधा के कारण सीमित समय में होलिका दहन; 3 मार्च को चंद्र ग्रहण, सूतक नियमों के पालन की अपील

निवाड़ी। today india news mp
इस वर्ष होलिका दहन और चंद्र ग्रहण एक ही अवधि में पड़ने से धार्मिक अनुष्ठानों के समय को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
ज्योतिषीय गणना के अनुसार पूर्णिमा तिथि 2 मार्च की शाम 05:55 बजे से आरंभ होकर 3 मार्च की शाम 05:07 बजे तक रहेगी। इसी अवधि में भद्रा का प्रभाव भी रहने से होलिका दहन के लिए सीमित और विशिष्ट मुहूर्त निर्धारित किया गया है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार भद्रा काल में होलिका दहन वर्जित माना जाता है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार 2 मार्च की शाम 05:55 बजे से भद्रा प्रारंभ होकर रात्रि में समाप्त होगी। ऐसे में 2 मार्च को होलिका दहन के लिए मध्यरात्रि के बाद का समय शुभ बताया गया है। विशेषज्ञों ने 2 मार्च की रात लगभग 12:40 बजे से 01:52 बजे के बीच होलिका दहन करना श्रेष्ठ माना है।
इसी बीच 3 मार्च को चंद्र ग्रहण भी लगेगा।
ग्रहण का समय दोपहर 03:20 बजे से शाम 06:47 बजे तक बताया गया है। ग्रहण के कारण सूतक काल ग्रहण आरंभ होने से लगभग 9 घंटे पहले, यानी सुबह लगभग 06:20 बजे से प्रभावी माना जाएगा। सूतक अवधि में पूजा-पाठ, भोजन पकाने और नए कार्यों की शुरुआत से परहेज करने की सलाह दी गई है।
धार्मिक परंपरा के अनुसार सूतक लगने से पहले स्नान एवं आवश्यक पूजन कर लेने चाहिए। ग्रहण काल में भोजन ग्रहण नहीं किया जाता और जल, दूध आदि में तुलसी या कुश डालकर शुद्धता बनाए रखने की परंपरा है। ग्रहण समाप्ति के बाद पुनः स्नान कर सामान्य धार्मिक क्रियाएं की जाती हैं।
होलिका पूजन के लिए सूखा नारियल, गुड़, सुपारी, लौंग, इलायची, बताशे, काला तिल, पीली सरसों तथा गेहूं की बाल आदि सामग्री का प्रयोग किया जाता है। पूजन के बाद परिक्रमा कर जल अर्पित करने की परंपरा निभाई जाती है।
धार्मिक विद्वानों ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे निर्धारित मुहूर्त और परंपरागत नियमों का पालन करते हुए होलिका दहन और ग्रहण से संबंधित अनुष्ठान संपन्न करें, ताकि पर्व की धार्मिक मर्यादा और आस्था दोनों सुरक्षित रहे।




