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सुप्रीम कोर्ट में पश्चिम बंगाल की SIR प्रक्रिया पर सुनवाई, मतदाता सूची से नाम हटाने पर राज्य सरकार को फटकार

CJI सूर्यकांत बोले- न्यायिक अधिकारियों पर सवाल उठाने की हिम्मत न करें

नई दिल्ली: Supreme Court of India में पश्चिम बंगाल में चल रही SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने विशेष रूप से मतदाता सूची से नाम हटाने के मामलों पर गंभीर चिंता जताई और कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बेहद जरूरी है।

सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश Justice Surya Kant ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि न्यायिक अधिकारियों पर सवाल उठाना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने सभी पक्षों को चेतावनी देते हुए कहा कि अदालत की निगरानी में चल रही प्रक्रिया पर अनावश्यक आरोप लगाने से बचें।

मतदाता सूची से नाम हटाने पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी पूछा कि मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए किन नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किया गया। कोर्ट ने कहा कि किसी भी मतदाता का नाम हटाने से पहले पूरी पारदर्शिता और उचित कारण होना चाहिए, क्योंकि यह सीधे तौर पर नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा मामला है।
SIR प्रक्रिया को लेकर सभी पक्षों को सावधान रहने की सलाह

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि SIR प्रक्रिया एक संवेदनशील प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया है, इसलिए इसमें शामिल सभी पक्षों को जिम्मेदारी के साथ काम करना चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि न्यायिक अधिकारियों की निष्पक्षता पर बिना आधार के सवाल उठाना न्यायपालिका की गरिमा के खिलाफ है।

अगली सुनवाई में मांगा गया विस्तृत जवाब
अदालत ने राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों से मामले पर विस्तृत जवाब मांगा है। कोर्ट ने संकेत दिया कि यदि प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो इस पर सख्त कार्रवाई की जा सकती है।

इस मामले की अगली सुनवाई में अदालत यह भी देखेगी कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया कानूनी प्रावधानों और चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप हुई या नहीं।

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