https://todayindianewsmp.live/wp-content/uploads/2024/01/jjujuu.gifUncategorizedइंदौरग्वालियरटॉप न्यूज़दतियानिवाड़ीपृथ्वीपरभोपालमध्य प्रदेशमध्यप्रदेशराजनीतिश्रीरामराजा सरकार धाम ओरछासागरसोशल मीडिया प्लेटफार्म

ग्वालियर-चंबल से लेकर पूरे मध्यप्रदेश के नगरीय निकायों में जेम पोर्टल (GeM Portal) से खरीदी में करोड़ों का घोटाला: दो लाख का कचरा वाहन छह लाख में और एलईडी लाइट में भारी हेरफेर

​250 करोड़ रुपये के वित्तीय गोलमाल का अंदेशा; सरकार को पिछले 2 से 3 वर्षों के प्रत्येक निकाय के रिकॉर्ड की जांच कराने की उठी मांग। ​एक ही सामान की कीमतों में भारी अंतर और मनमाने दामों पर खरीदी से अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल।

विस्तार से समाचार (Detailed News):टुडे इंडिया न्यूज़ एमपी

​भोपाल/ग्वालियर:

  • ​GEM पोर्टल के जरिए हुई खरीदी में बड़ा फर्जीवाड़ा: प्रदेश के 374 नगरीय निकायों की 1,134 करोड़ की सरकारी खरीद में कीमतों का भारी अंतर।
  • ​औसत दरों पर खरीदी होती तो बच सकते थे करीब 250 करोड़ रुपये।
  • ​प्रमुख सचिव संजय दुबे ने अधिकारियों को दी सख्त चेतावनी, कहा- दोषियों के खिलाफ होगी कड़ी कार्रवाई।

मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों में सामान खरीदी को लेकर एक बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आया है, जो अब केवल ग्वालियर-चंबल संभाग तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे प्रदेश के नगरीय निकाय संदेह के घेरे में आ गए हैं। सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM Portal) के माध्यम से की गई खरीदी में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं और भ्रष्टाचार उजागर हुआ है।

​हाल ही में भोपाल में आयोजित नगरीय प्रशासन विभाग की एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में यह खुलासा हुआ कि प्रदेश के विभिन्न निकायों द्वारा खरीदे गए सामानों की कीमतों में भारी विसंगतियां थीं। स्थिति यह है कि जो कचरा वाहन बाजार में या सामान्य दरों पर करीब 2 लाख रुपये में उपलब्ध होना चाहिए था, उसे कई निकायों द्वारा 6 लाख रुपये तक की भारी-भरकम कीमत पर खरीदा गया। इसके अलावा, एलईडी लाइटों की खरीदी में भी अभूतपूर्व अंतर देखने को मिला—जहां एक तरफ कुछ निकायों ने एक एलईडी लाइट 306 रुपये में खरीदी, वहीं अन्य निकायों में उसी कोटि की एलईडी के लिए 11,800 रुपये तक चुकाए गए।

​राजस्व और सरकारी खजाने को भारी चपत:

विभागीय आंकड़ों के विश्लेषण से यह बात सामने आई है कि प्रदेश के 374 नगरीय निकायों ने पिछले तीन वर्षों के दौरान लगभग 1,134 करोड़ रुपये की सरकारी खरीदी की। यदि यह खरीदी मानक और औसत बाजार दरों पर की जाती, तो लगभग 250 करोड़ रुपये की भारी बचत हो सकती थी। जानकारों और स्थानीय स्तर पर उठ रही माँग के अनुसार, इस पूरे मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सरकार को पिछले 2 से 3 वर्षों के प्रत्येक नगरीय निकाय के खरीद रिकॉर्ड को गहराई से खंगालना चाहिए, ताकि संलिप्त अधिकारियों और वित्तीय अनियमितताओं में शामिल लोगों की जवाबदेही तय की जा सके।

​प्रशासनिक चेतावनी:

मामले की गंभीरता को देखते हुए नगरीय प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव (ACS) संजय दुबे ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि किस निकाय ने किस दर पर क्या सामान खरीदा है, इसका पूरा डिजिटल और भौतिक रिकॉर्ड सरकार के पास मौजूद है। गड़बड़ी करने वाले किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा और जांच के दायरे में दोषी पाए जाने पर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Click to listen highlighted text!
error: Content is protected !!