मप्र के नगरीय निकायों में वित्तीय अनियमितताओं पर बड़ा एक्शन: 22 नगर पालिकाओं और 39 नगर परिषदों के अधिकारी रडार पर, 7 बर्खास्त 392 अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई, लोकायुक्त जांच के घेरे में कई बड़े मामले
लोकायुक्त के शिकंजे में कई जिले: स्थानीय टेंडर और कोटेशन खरीद में धांधली पर धार, गुना, निवाड़ी, ब्यौहारी, गोहद और नीमच के तत्कालीन प्रभारी CMO और इंजीनियरों पर लटकी तलवार। वित्तीय अनुशासनहीनता पर सख्त सजा: अब तक 7 भ्रष्ट अधिकारी बर्खास्त, 3 से 4 करोड़ रुपये की रिकवरी और 80 से अधिक ठेकेदार व सप्लायर ब्लैकलिस्ट/कार्रवाई के दायरे में।

टुडे इंडिया न्यूज एमपी
मुख्य समाचार (Headline)
मध्यप्रदेश में वित्तीय घोटालों पर सरकार का बड़ा हंटर:लोकायुक्त के शिकंजे में कई जिले: स्थानीय टेंडर और कोटेशन खरीद में धांधली पर धार, गुना, निवाड़ी, ब्यौहारी, गोहद और नीमच के तत्कालीन प्रभारी CMO और इंजीनियरों पर लटकी तलवार
22 नगर पालिकाओं और 39 नगर परिषदों में गड़बड़ी पर कड़ा एक्शन, 135 CMO सहित 392 अधिकारी-कर्मचारी नपे, 7 बर्खास्त; 6 मामलों की लोकायुक्त जांच शुरू।
भ्रष्टाचार रोकने के लिए डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल: गड़बड़ियों पर लगाम कसने के लिए एआई (AI) और आधुनिक तकनीकी निगरानी का हो रहा उपयोग।
भोपाल:
मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य के नगरीय निकायों में फैली वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के खिलाफ अब तक का सबसे कड़ा रुख अपनाया है। प्रदेश के 22 नगर पालिकाओं और 39 नगर परिषदों में खरीद-फरोख्त और स्थानीय टेंडर के नाम पर बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ियां सामने आने के बाद शासन ने लगभग 392 अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की है।
नगरीय प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव (ACS) श्री संजय दुबे ने इस बात का खुलासा करते हुए बताया कि सरकार जनता के एक-एक पाई के पारदर्शी इस्तेमाल को लेकर प्रतिबद्ध है और भ्रष्टाचार किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
135 मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) भी रडार पर
सरकार द्वारा की गई इस बड़ी कार्रवाई की जद में कुल 392 अधिकारी-कर्मचारी आए हैं, जिनमें अकेले 135 मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) शामिल हैं। अनियमितताओं की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने त्वरित एक्शन लेते हुए अब तक 7 अधिकारियों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया है। इसके साथ ही वित्तीय गड़बड़ी के जरिए डकारे गए 3 से 4 करोड़ रुपये की रिकवरी भी की जा चुकी है। शासन के दिशा-निर्देशों की धज्जियां उड़ाने वाले 80 से अधिक ठेकेदारों और सप्लायर्स पर भी शिकंजा कसा गया है।
इन जिलों में छह मामलों की लोकायुक्त जांच
स्थानीय स्तर पर कोटेशन और बिना टेंडर के लोकल परचेसिंग के जरिए सरकारी खजाने को चपत लगाने के छह प्रमुख मामलों को लोकायुक्त जांच के दायरे में सौंप दिया गया है। ये संदेहास्पद मामले मुख्य रूप से निम्नलिखित निकायों से जुड़े हैं:
- धार और गुना नगर पालिकाएं
- निवाड़ी जिले की एक नगर परिषद
- ब्यौहारी नगर परिषद
- गोहद नगर पालिका
- नीमच नगर पालिका
इन सभी मामलों में उस दौरान पदस्थ रहे तत्कालीन प्रभारी सीएमओ (CMO) और संबंधित इंजीनियर जांच एजेंसियों के सीधे निशाने पर हैं। शुरुआती दौर में स्थानीय खरीदी और जेम (GeM) पोर्टल के माध्यम से हुई खरीद में भारी विसंगतियां पाई गई हैं।
पारदर्शिता के लिए तकनीक और AI का सहारा
भविष्य में इस तरह की वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए नगरीय प्रशासन विभाग अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल तकनीक का उपयोग कर रहा है। तकनीकी टूल्स के माध्यम से ऑनलाइन खरीदी, बिलों के भुगतान और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर पैनी नजर रखी जा रही है।
“सरकार का स्पष्ट और कड़ा उद्देश्य है—जनता के गाढ़े पसीने की कमाई के पैसे का पारदर्शी उपयोग हो और इसका पूरा लाभ सीधे अंतिम छोर के नागरिकों तक पहुँचे।”
— श्री संजय दुबे, एसीएस (ACS), नगरीय प्रशासन विभाग
इस ताबड़तोड़ कार्रवाई से पूरे प्रदेश के नगरीय निकायों और स्थानीय प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है। जानकारों का मानना है कि इस तरह के सख्त कदमों से सरकारी कामकाज में वित्तीय अनुशासन और जवाबदेही तय होगी।




