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दो साल में बड़ा कदम: ओरछा, मांडू और सतपुड़ा यूनेस्को विश्व धरोहर की प्रक्रिया में शामिल

भारत की विरासत सूची में 15 और स्थलों के नामांकन भीकतार  में

To day india news mp निवाड़ी। पिछले दो वर्षों में मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक-प्राकृतिक धरोहरों को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में अहम प्रगति हुई है। ओरछा, मांडू और सतपुड़ा को यूनेस्को विश्व धरोहर नामांकन/प्रक्रिया में शामिल किया गया है। इससे राज्य ही नहीं, पूरे देश की सांस्कृतिक और जैव-विविधता आधारित विरासत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूती मिली है।

क्या है महत्व?
ओरछा: बुंदेलकालीन स्थापत्य, किले-महल और मंदिरों की अनूठी श्रृंखला के कारण ऐतिहासिक शहर के रूप में पहचान।


मांडू: मालवा की राजधानी रहा यह नगर जहाज़ महल, बाज़ बहादुर महल और अफगानी स्थापत्य के लिए प्रसिद्ध।


सतपुड़ा: घने जंगल, समृद्ध जैव-विविधता और प्राकृतिक परिदृश्य—प्राकृतिक धरोहर के मानकों पर मजबूत दावेदारी।

आगे क्या?
यूनेस्को की प्रक्रिया बहु-चरणीय होती है—टेंटेटिव लिस्ट, विस्तृत डोज़ियर, तकनीकी मूल्यांकन और अंततः समिति का निर्णय। नामांकन में शामिल होना अपने-आप में बड़ी उपलब्धि है, जबकि अंतिम सूची में शामिल होना अगला लक्ष्य है।

 

15 और स्थल कतार में
इसके साथ ही देशभर से करीब 15 अन्य विरासत स्थलों के नामांकन प्रस्ताव भी तैयार/प्रक्रियाधीन हैं। इनमें ऐतिहासिक नगर, किले, धार्मिक-सांस्कृतिक परिसर और विशिष्ट प्राकृतिक परिदृश्य शामिल बताए जा रहे हैं। इनके चयन से पर्यटन, स्थानीय रोजगार और संरक्षण प्रयासों को नई गति मिलने की उम्मीद है।

ओरछा, मांडू और सतपुड़ा का नामांकन भारत की “विरासत-पर्यटन + संरक्षण” रणनीति को मजबूत करता है। आने वाले समय में अंतिम स्वीकृति मिलने पर ये स्थल वैश्विक मानचित्र पर और भी चमकेंगे।

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