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ब्रिक्स का लक्ष्य अब आम नागरिक को मिले, दुनिया ने देखी ताकत: विदाई से भी रिश्तों में अपनेपन की गरमाहट
पीएम मोदी और जिनपिंग की जोड़ी और कूटनीतिक गर्मजोशी से चमका ब्रिक्स शिखर सम्मेलन डिजिटल कृषि, एमएसएमई पोर्टल और स्मार्ट फैक्ट्रियों के विकास पर बनी सहमति खनिज तकनीक के हथियारों की तरह इस्तेमाल पर रोक और नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था की पुरजोर मांग

ब्रिक्स का लक्ष्य अब आम नागरिक को मिले, दुनिया ने देखी ताकत: विदाई से भी रिश्तों में अपनेपन की गरमाहट
सब-हेडिंग:
- पीएम मोदी और जिनपिंग की जोड़ी और कूटनीतिक गर्मजोशी से चमका ब्रिक्स शिखर सम्मेलन
- डिजिटल कृषि, एमएसएमई पोर्टल और स्मार्ट फैक्ट्रियों के विकास पर बनी सहमती
- खनिज तकनीक के हथियारों की तरह इस्तेमाल पर रोक और नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था की पुरजोर मांग
नई दिल्ली / भोपाल:
भारत की अध्यक्षता में संपन्न हुए ऐतिहासिक ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन ने वैश्विक पटल पर एक नई ताकत और दिशा दिखाई है। सम्मेलन के दौरान दुनिया ने ब्रिक्स देशों की एकजुटता और कूटनीतिक चमक को महसूस किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग सहित अन्य वैश्विक नेताओं के बीच मुलाकातों और विदाई के पलों में कूटनीति के साथ-साथ रिश्तों के अपनेपन की गहरी गरमाहट देखने को मिली।
यह सम्मेलन इस बात का गवाह बना कि अब ब्रिक्स का मुख्य उद्देश्य केवल सरकारों तक सीमित रहना नहीं, बल्कि इसका सीधा लाभ आम नागरिकों, किसानों, युवाओं और उद्यमियों तक पहुंचाना है।
प्रमुख बिंदु और घोषित एजेंडे:
- आमजन और कारोबारियों के लिए नए द्वार: कृषि के क्षेत्र को आधुनिक बनाने के लिए ‘ब्रिक्स डिजिटल कृषि नेटवर्क’ की शुरुआत की गई है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक तकनीकों का उपयोग करेगा। वहीं, व्यापारियों और उद्यमियों की सुगमता के लिए एमएसएमई (MSME) पोर्टल और स्टार्टअप इनक्यूबेटर नेटवर्क को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है।
- तकनीक और खनिजों के हथियार के रूप में इस्तेमाल पर चेतावनी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट रूप से चेताया कि महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) और आधुनिक तकनीकों का हथियारों की तरह इस्तेमाल वैश्विक विकास में सबसे बड़ी बाधा बन सकता है। फैसले ताकत के बल पर नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय नियमों और पारदर्शिता के आधार पर होने चाहिए।
- भीम तंत्र और साझा बाजार की दिशा में कदम: आपसी व्यापार को मजबूत करने, स्थानीय मुद्राओं में लेन-देन को बढ़ावा देने और सुदृढ़ वित्तीय सहयोग के लिए नए भुगतान तंत्र (Payment Mechanisms) व साझा बाजारों को विकसित करने पर विचार-विमर्श तेज हो गया है।
- पश्चिमी गठबंधन और जन कल्याण की चुनौतियां: मौजूदा भू-राजनीतिक तनावों और पश्चिमी गठबंधनों की नीतियों से वैश्विक जन कल्याण तथा खाद्य सुरक्षा पर मंडरा रहे खतरों के बीच, ब्रिक्स देशों ने विकासशील देशों (Global South) की आवाज को बुलंद करने और बहुपक्षीय प्रणाली को अधिक न्यायसंगत बनाने का संकल्प लिया है।
संवाददाता – टुडे इंडिया न्यूज, एमपी




