लखनऊ से ‘सुपरसोनिक’ प्रहार: ब्रह्मोस मिसाइलों की पहली खेप रवाना
उत्तर प्रदेश डिफेंस कॉरिडोर की बड़ी उपलब्धि; अब सालाना 100 मिसाइलों के उत्पादन से अभेद्य होगी भारत की सुरक्षा

लखनऊ/नई दिल्ली: भारत की सैन्य शक्ति में आज एक नया अध्याय जुड़ गया है। लखनऊ स्थित नए ब्रह्मोस मैन्युफैक्चरिंग प्लांट से मिसाइलों की डिलीवरी आधिकारिक रूप से शुरू हो गई है। उत्तर प्रदेश डिफेंस कॉरिडोर के तहत स्थापित इस अत्याधुनिक केंद्र से मिसाइलों का पहला बैच सेना को सौंप दिया गया है, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक मील का पत्थर है।
अक्टूबर 2025 में हुआ था आगाज
अक्टूबर 2025 में परिचालन शुरू करने के बाद, इस प्लांट ने रिकॉर्ड समय में अपनी पहली सफलता हासिल की है। चार मिसाइलों का पहला बैच तैयार कर सेना को डिलीवरी के लिए भेज दिया गया है। यह प्लांट न केवल रक्षा क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की भूमिका को बढ़ा रहा है, बल्कि भारतीय सेना की मारक क्षमता को त्वरित गति से अपडेट करने में भी सहायक सिद्ध होगा।
लखनऊ प्लांट की मुख्य विशेषताएं:
- उत्पादन क्षमता: यह प्लांट सालाना 80 से 100 ब्रह्मोस मिसाइलें बनाने की क्षमता रखता है।
- तीनों सेनाओं को लाभ: यहाँ से तैयार मिसाइलें थल सेना, वायु सेना और नौसेना, तीनों अंगों की जरूरतों को पूरा करेंगी।
- स्वदेशी ताकत: इस प्लांट के सक्रिय होने से विदेशी निर्भरता कम होगी और रक्षा उत्पादन में भारत की वैश्विक साख बढ़ेगी।
क्यों खास है यह डिलीवरी?
ब्रह्मोस दुनिया की सबसे तेज और सटीक मार करने वाली सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल मानी जाती है। लखनऊ में इसके बड़े पैमाने पर उत्पादन से अब सेना को नई मिसाइलों के लिए लंबा इंतजार नहीं करना होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल भारत की सीमाएं सुरक्षित होंगी, बल्कि भविष्य में मित्र देशों को निर्यात की संभावनाओं को भी बल मिलेगा।
ब्यूरो रिपोर्ट: टुडे इंडिया न्यूज एमपी
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