मध्य प्रदेश की एकमात्र तकनीकी यूनिवर्सिटी RGPV का तीन हिस्सों में पुनर्गठन: भोपाल, उज्जैन और जबलपुर में बनेंगे नए प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय
कैबिनेट बैठक में बड़ा फैसला: भौगोलिक स्थिति, क्षेत्रीय संतुलन और प्रशासनिक सुगमता के चलते राज्य सरकार ने लिया ऐतिहासिक निर्णय। विस्तृत दायरा: वर्तमान आरजीपीवी से संबद्ध हैं 585 संस्थान और 3.83 लाख से अधिक विद्यार्थी। क्षेत्रीय यूनिवर्सिटी: मध्य भारत (भोपाल), मालवा (उज्जैन) और महाकौशल (जबलपुर) नाम से संचालित होंगे नए तकनीकी एवं कौशल विश्वविद्यालय।

टुडे इंडिया न्यूज एमपी
भोपाल:
प्रदेश की एकमात्र तकनीकी यूनिवर्सिटी राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) को प्रशासनिक दक्षता और भौगोलिक स्थिति को देखते हुए तीन भागों में बांटने की आधिकारिक स्वीकृति दे दी गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लगी। बैठक के बाद निर्णय की विस्तृत जानकारी साझा करते हुए लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) मंत्री राकेश सिंह ने बताया कि तकनीकी शिक्षा के विकेंद्रीकरण और छात्रों की सुविधा के लिए यह कदम उठाया गया है।
वर्तमान व्यवस्था के तहत RGPV से प्रदेशभर के कुल 585 तकनीकी संस्थान संबद्ध हैं, जिनमें लगभग 3 लाख 83 हजार छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। अब इन सभी संस्थानों को उनकी भौगोलिक स्थिति के आधार पर तीन नए विश्वविद्यालयों के अंतर्गत विभाजित किया जाएगा। तीनों ही नए विश्वविद्यालयों में सुचारू संचालन के लिए नए पदों के सृजन को भी मंजूरी मिल गई है।
संभागवार ऐसा रहेगा नया ढांचा और कार्यक्षेत्र:
- मध्य भारत प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय, भोपाल: इस यूनिवर्सिटी का मुख्यालय भोपाल में होगा। इसके अधिकार क्षेत्र में भोपाल, नर्मदापुरम, ग्वालियर और चंबल संभाग के सभी जिले आएंगे। मौजूदा भोपाल परिसर को इसी नए स्वरूप में विकसित किया जाएगा।
- मालवा प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय, उज्जैन: इसके अंतर्गत उज्जैन और इंदौर संभाग के सभी तकनीकी एवं इंजीनियरिंग कॉलेज शामिल होंगे। उज्जैन स्थित प्रमुख संस्थानों को इसका केंद्र बनाया गया है।
- महाकौशल प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय, जबलपुर: इस विश्वविद्यालय के दायरे में जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग के समस्त जिले आएंगे। जबलपुर के प्रमुख तकनीकी संस्थानों को अपग्रेड कर इसे स्थापित किया जा रहा है।
प्रशासनिक और शैक्षणिक सुधारों को गति
सरकार के इस निर्णय से तकनीकी शिक्षा का स्तर और अधिक उन्नत होगा तथा विद्यार्थियों को अपने संभाग स्तर पर ही डिग्री, परीक्षा और अन्य प्रशासनिक कार्यों के समाधान में सुगमता मिलेगी। तीनों विश्वविद्यालयों के लिए पृथक अधिनियम और विधिक प्रावधान तैयार किए जा रहे हैं, जिससे आने वाले समय में उच्च तकनीकी शिक्षा का तंत्र अधिक मजबूत और पारदर्शी बन सके।




