सड़क हादसों में घायलों को बड़ी राहत
केंद्र सरकार का कैशलेस ट्रीटमेंट का ऐलान, ₹1.50 लाख तक मुफ्त इलाज

नई दिल्ली। सड़क दुर्घटनाओं में घायल होने वालों के लिए केंद्र सरकार ने ऐतिहासिक कदम उठाते हुए कैशलेस ट्रीटमेंट स्कीम लागू कर दी है। इसके तहत अब देशभर में किसी भी सड़क हादसे में घायल व्यक्ति को इलाज के लिए एक भी रुपया नहीं देना होगा। सरकार सीधे अस्पताल को भुगतान करेगी और इलाज की अधिकतम सीमा ₹1.50 लाख तय की गई है।

🔹 क्या है कैशलेस ट्रीटमेंट योजना?
इस योजना का उद्देश्य दुर्घटना के बाद घायल व्यक्ति को तुरंत इलाज दिलाना है ताकि पैसों के अभाव में इलाज में देरी न हो। हादसे के तुरंत बाद मरीज को सूचीबद्ध (डिजाइनेटेड) अस्पताल में भर्ती कराया जाएगा और वहां इलाज पूरी तरह कैशलेस होगा।

🔹 कितने दिन तक मिलेगा मुफ्त इलाज?
दुर्घटना की तारीख से लेकर 7 दिन तक इस योजना के तहत इलाज का खर्च सरकार उठाएगी। इस दौरान आवश्यक जांच, सर्जरी, दवाइयां, बेड चार्ज और अन्य मेडिकल सुविधाएं ₹1.50 लाख की सीमा तक कवर होंगी।
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🔹 किसे मिलेगा इस योजना का लाभ?
देश में होने वाली किसी भी सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति
चाहे वह पैदल यात्री हो, बाइक सवार, कार चालक या कोई अन्य
किसी भी आयु, जाति या वर्ग का व्यक्ति
इलाज के लिए सूचीबद्ध अस्पताल में भर्ती होना आवश्यक

🔹 अस्पताल पैसे क्यों नहीं मांग सकेगा?
सरकार ने अस्पतालों को इस योजना से जोड़ा है। इलाज का बिल सरकारी पोर्टल के जरिए सीधे सरकार से क्लेम किया जाएगा। इस कारण अस्पताल मरीज या उसके परिजनों से पैसे नहीं मांग सकेगा।

🔹 पुलिस सूचना क्यों जरूरी है?
दुर्घटना की सूचना पुलिस को 24 घंटे के भीतर देना जरूरी होगा। इससे यह प्रमाणित होगा कि मामला वास्तव में सड़क दुर्घटना से जुड़ा है और मरीज को योजना का लाभ मिल सकेगा।
🔹 अगर नजदीकी अस्पताल सूचीबद्ध नहीं है तो?
ऐसी स्थिति में मरीज को पहले नजदीकी अस्पताल में प्राथमिक उपचार दिया जाएगा ताकि उसकी जान बचाई जा सके। इसके बाद उसे योजना में शामिल अस्पताल में रेफर किया जाएगा, जहां पूरा इलाज कैशलेस होगा।
🔹 सरकार का मकसद क्या है?
सरकार का उद्देश्य है कि सड़क हादसे के बाद
इलाज में देरी न हो
मृत्यु दर कम की जा सके
गरीब और मध्यम वर्ग को आर्थिक संकट से बचाया जा सके
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🟢 निष्कर्ष
कैशलेस ट्रीटमेंट स्कीम सड़क हादसों में घायल लोगों के लिए जीवनरक्षक योजना साबित होगी। अब किसी की जान पैसों के अभाव में नहीं जाएगी और हर व्यक्ति को तुरंत और सम्मानजनक इलाज मिल सकेगा।




