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​वैश्विक महासंकट: क्या भारत बनेगा दुनिया का ‘संकटमोचक’? जानिए नई दिल्ली की मास्टर स्ट्रैटेजी

अमेरिका-ईरान युद्ध और आर्थिक अस्थिरता के बीच 'विश्व-बंधु' के रूप में उभरा भारत; कूटनीति और आत्मनिर्भरता का नया मॉडल पेश

नई दिल्ली/भोपाल | Today India News MP

साल 2026 की शुरुआत दुनिया के लिए युद्ध और आर्थिक अनिश्चितता की काली छाया लेकर आई है. पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजरायल बनाम ईरान के भीषण संघर्ष और वैश्विक सप्लाई चेन के चरमराने से पूरी दुनिया संकट में है. लेकिन इस ‘पॉलीक्राइसिस’ (बहुआयामी संकट) के दौर में भारत न केवल अपनी अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखे हुए है, बल्कि एक वैश्विक मार्गदर्शक की भूमिका में भी नजर आ रहा है.

1. भारत की रणनीति: ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ (Strategic Autonomy)

​भारत ने किसी भी गुट (Block) में शामिल होने के बजाय अपनी ‘Strategic Autonomy’ को प्राथमिकता दी है.

  • संतुलन: भारत एक तरफ अमेरिका के साथ ‘iCET’ जैसे तकनीकी रक्षा समझौतों पर काम कर रहा है, तो दूसरी तरफ रूस से सस्ता तेल खरीदकर और ईरान के साथ कूटनीतिक संवाद बनाए रखकर अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा कर रहा है.
  • शांति का दूत: प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में स्पष्ट किया कि “यह युद्ध का युग नहीं है.” भारत इस समय दुनिया का अकेला ऐसा देश है जिसके संबंध वाशिंगटन और तेहरान दोनों से मधुर हैं, जिससे वह एक विश्वसनीय मध्यस्थ (Mediator) बन गया है.

2. ‘ग्लोबल साउथ’ की बुलंद आवाज

​जब विकसित देश युद्ध और प्रतिबंधों में उलझे हैं, भारत अफ्रीका, लाैटिन अमेरिका और दक्षिण-पूर्व एशिया के विकासशील देशों की चिंताओं को वैश्विक मंचों पर उठा रहा है.

  • खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा: भारत ने संकट के समय कई देशों को अनाज और दवाइयां भेजकर खुद को ‘Global Supply Chain’ का एक विश्वसनीय विकल्प साबित किया है.
  • ऋण संकट: भारत उन छोटे देशों के लिए आवाज उठा रहा है जो वैश्विक युद्ध के कारण कर्ज के बोझ तले दबे जा रहे हैं.

3. आर्थिक मोर्चा: चुनौतियों के बीच ‘ग्रोथ इंजन’

​ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2026 में भारत की जीडीपी 6.6% की दर से बढ़ने का अनुमान है, जो इसे दुनिया की सबसे तेज बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बनाए रखेगा.

  • आत्मनिर्भरता का कवच: भारत ने ‘मेक इन इंडिया’ और ‘PLI स्कीम’ के जरिए रक्षा और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में आयात पर निर्भरता कम की है.
  • ऊर्जा विकल्प: पेट्रोल-डीजल की कीमतों में उछाल को देखते हुए भारत ने एथेनॉल ब्लेंडिंग और हाइड्रोजन मिशन में तेजी लाई है, जिससे विदेशी मुद्रा की बचत हो रही है.

4. डिजिटल डिप्लोमेसी (DPI)

​भारत का ‘UPI’ और ‘इंडिया स्टैक’ अब वैश्विक मॉडल बन चुका है. युद्ध के कारण पारंपरिक बैंकिंग प्रणालियों में आने वाली रुकावटों के बीच, भारत का सस्ता और पारदर्शी डिजिटल पेमेंट सिस्टम दुनिया को एक नया रास्ता दिखा रहा है.

MP की विशेष नजर: > मध्य प्रदेश के लिए भी यह संकट अवसर लेकर आया है. वैश्विक गेहूं आपूर्ति में कमी को देखते हुए, एमपी के शरबती गेहूं की मांग अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बढ़ी है. साथ ही, इंदौर और पीथमपुर जैसे इंडस्ट्रियल हब वैश्विक कंपनियों के लिए चीन के विकल्प के रूप में उभर रहे हैं.

 

निष्कर्ष:

भारत की रणनीति स्पष्ट है—“स्वदेशी मजबूती और वैश्विक जिम्मेदारी”. भारत अब केवल घटनाओं पर प्रतिक्रिया नहीं देता, बल्कि वैश्विक एजेंडा तय कर रहा है. 1.4 अरब भारतीयों का आत्मविश्वास ही आज भारत को दुनिया का ‘शांतिदूत’ और ‘आर्थिक इंजन’ बना रहा है.

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