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​विदेशी चंदे से ‘धर्मांतरण’ के खेल पर कड़ा प्रहार: मोदी सरकार का FCRA संशोधन बिल 2026 संसद में पेश

​NGOs की मनमानी पर लगेगी लगाम; अवैध गतिविधियों में शामिल संस्थाओं की संपत्तियां होगी जब्त

नई दिल्ली | 2 अप्रैल, 2026

भारत की आंतरिक सुरक्षा और सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित करने वाले विदेशी फंड के दुरुपयोग को रोकने के लिए मोदी सरकार ने एक निर्णायक कदम उठाया है। 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 (FCRA Amendment Bill, 2026) आज संसद में चर्चा का मुख्य केंद्र रहा। इस बिल का सीधा लक्ष्य उन विदेशी ताकतों और NGOs पर नकेल कसना है, जो ‘समाज सेवा’ की आड़ में देश के जनसांख्यिकीय ढांचे (Demographics) से खिलवाड़ कर रहे हैं।

विधेयक की मुख्य विशेषताएं: सख्त प्रावधान और सीधी कार्रवाई

​सरकार द्वारा लाए गए इस नए कानून में विदेशी चंदे के इस्तेमाल को लेकर बेहद कड़े प्रावधान किए गए हैं:

  • संपत्तियों की जब्ती: यदि कोई NGO जबरन या प्रलोभन देकर धर्मांतरण कराने जैसी अवैध गतिविधियों में लिप्त पाया जाता है, तो सरकार को उसकी विदेशी फंड से बनी चल-अचल संपत्तियों को जब्त करने का अधिकार होगा।
  • नामित प्राधिकरण (Designated Authority): बिल में एक ‘नामित प्राधिकरण’ के गठन का प्रस्ताव है, जो उन NGOs की संपत्तियों और फंड का प्रबंधन करेगा जिनका रजिस्ट्रेशन रद्द या निलंबित कर दिया गया है।
  • फंड की समय-सीमा: अब विदेशी चंदा प्राप्त करने के लिए 3 वर्ष और उसे खर्च करने के लिए 4 वर्ष की सख्त समय-सीमा तय की गई है, ताकि फंड की ‘पार्किंग’ या दुरुपयोग न हो सके।
  • पारदर्शिता और जवाबदेही: NGOs को अपने खर्चों और संपत्तियों का पूरा विवरण सरकार को देना अनिवार्य होगा।

विपक्ष का हंगामा: ‘मकर द्वार’ पर कांग्रेस का प्रदर्शन

​संसद में इस बिल के पेश होते ही विपक्षी दलों, विशेषकर कांग्रेस ने तीखा विरोध शुरू कर दिया है। राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी सांसदों ने संसद के मकर द्वार पर प्रदर्शन किया और इसे ‘काला कानून’ करार दिया।

​विपक्ष का आरोप है कि यह बिल अल्पसंख्यकों और विशेष रूप से ईसाई मिशनरियों को निशाना बनाने के लिए लाया गया है। कांग्रेस सांसद हिबी ईडन और के.सी. वेणुगोपाल ने इसे “लोकतंत्र पर हमला” बताया है। वहीं, सत्ता पक्ष का सवाल है कि यदि विदेशी फंड का उपयोग नेक कार्यों में हो रहा है, तो जांच और पारदर्शिता से डर कैसा?

निष्कर्ष: राष्ट्रहित सर्वोपरि

​विशेषज्ञों का मानना है कि यह बिल भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करेगा। लंबे समय से यह शिकायतें आ रही थीं कि विदेशी चंदे का इस्तेमाल भारत विरोधी एजेंडा चलाने और संवेदनशील इलाकों में धर्मांतरण के लिए किया जा रहा है। मोदी सरकार का यह नया प्रहार स्पष्ट संदेश देता है कि “सेवा के नाम पर षड्यंत्र” अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

“भारत की अखंडता और सुरक्षा से समझौता किसी भी कीमत पर नहीं होगा। विदेशी धन का हिसाब देना ही होगा।”सरकारी सूत्रों के अनुसार

 

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