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​ऐतिहासिक कदम: लोकसभा में 850 सीटों वाला विधेयक पेश, पक्ष में पड़े 251 वोट

परिसीमन और महिला आरक्षण को 2029 तक लागू करने की दिशा में सरकार का बड़ा दांव; विपक्ष ने वोटिंग के दौरान जताया कड़ा विरोध

नई दिल्ली/भोपाल:

संसद के विशेष सत्र के दौरान आज केंद्र सरकार ने भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास का एक बड़ा विधेयक, संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 लोकसभा में पेश किया। इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य लोकसभा की सीटों को मौजूदा 543 से बढ़ाकर 850 करना है।

मतदान के आंकड़े: पक्ष और विपक्ष की स्थिति

​सदन में विधेयक को पेश करने के दौरान हुए शुरुआती विभाजन (Division) में वोटों का गणित कुछ इस प्रकार रहा:

  • पक्ष में मत: 251 (AYES)
  • विपक्ष में मत: 185 (NOES)
  • कुल मतदान: 333 (विपक्षी सांसदों द्वारा ‘डिवीजन’ की मांग के बाद इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम से हुई वोटिंग)।

विधेयक की मुख्य बातें:

  • सीटों का विस्तार: लोकसभा में अब अधिकतम 815 सीटें राज्यों से और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों से होंगी।
  • महिला आरक्षण का रास्ता साफ: सरकार का लक्ष्य 2029 के आम चुनाव से पहले 33% महिला आरक्षण को प्रभावी बनाना है। सीटों की संख्या बढ़ने से महिला सांसदों के लिए लगभग 273 सीटें सुरक्षित हो सकेंगी।
  • अनुच्छेद 82 में बदलाव: इस विधेयक के जरिए परिसीमन (Delimitation) की प्रक्रिया को जनगणना से अलग कर जल्द पूरा करने का प्रावधान है।

विपक्ष का विरोध क्यों?

​विपक्षी दलों, विशेषकर दक्षिण भारतीय राज्यों के नेताओं और कांग्रेस ने इस बिल पर आपत्ति जताई है। विपक्ष का आरोप है कि बिना नई जनगणना के सीटों का पुनर्निर्धारण करना लोकतंत्र के खिलाफ है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसे “महिला आरक्षण के नाम पर भ्रामक परिसीमन बिल” करार दिया है। विपक्षी सांसदों का तर्क है कि इससे उन राज्यों को नुकसान होगा जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर काम किया है।

आगे क्या होगा?

​चूंकि यह एक संविधान संशोधन विधेयक है, इसे पारित करने के लिए संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत (Special Majority) की आवश्यकता होगी। साथ ही, इसे देश के कम से कम 50% राज्यों की विधानसभाओं से भी मंजूरी दिलानी होगी।

ब्यूरो रिपोर्ट: today india news MP

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