पुष्पा झुकेगा नहीं’ कहने वाले जहांगीर खान ने चुनाव से पहले टेके घुटने! फॉलटा पुनर्मतदान से पहले टीएमसी उम्मीदवार का यू-टर्न, नामांकन लिया वापस
कलकत्ता हाई कोर्ट से मिली थी राहत, फिर भी छोड़ दिया मैदान: कोर्ट ने दी थी पुलिसिया कार्रवाई से सुरक्षा, लेकिन मतदान से चंद घंटे पहले टीएमसी प्रत्याशी के सरेंडर से राजनीतिक गलियारों में मंचा हड़कंप।

कोलकाता/फॉलटा:
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के सबसे संवेदनशील रणक्षेत्रों में से एक ‘फॉलटा विधानसभा सीट’ से इस वक्त की सबसे बड़ी राजनीतिक खबर सामने आ रही है। खुद को ‘पुष्पा’ बताकर “पुष्पा कभी झुकेगा नहीं” का नारा बुलंद करने वाले तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कद्दावर नेता और उम्मीदवार जहांगीर खान आखिरकार चुनावी रण में ‘झुक’ गए हैं। आगामी 21 मई को होने वाले फॉलटा विधानसभा के पूर्ण-पुनर्मतदान (Repolling) से ठीक पहले जहांगीर खान ने अचानक अपना नामांकन वापस लेकर सबको चौंका दिया है। प्रचार थमने के आखिरी पलों में हुए इस बड़े घटनाक्रम के बाद अब फॉलटा सीट पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की राह पूरी तरह निष्कंटक नजर आ रही है।
कोर्ट से मिली थी राहत, फिर क्यों भागे मैदान से?
दिलचस्प बात यह है कि बीते सोमवार (18 मई) को ही कलकत्ता हाई कोर्ट से जहांगीर खान को बड़ी राहत मिली थी। अदालत ने उनके खिलाफ दर्ज कई आपराधिक मामलों (FIR) के बावजूद उन्हें चुनाव लड़ने की अनुमति दी थी और चुनाव संपन्न होने (24 मई) तक पुलिस को किसी भी दंडात्मक कार्रवाई न करने का आदेश दिया था। कोर्ट की ढाल मिलने के बावजूद, वोटिंग से ठीक 48 घंटे पहले जहांगीर खान का इस तरह मैदान छोड़ना राजनीतिक पंडितों के गले नहीं उतर रहा है। चर्चा है कि क्षेत्र में केंद्रीय बलों की भारी तैनाती और जनता के भारी आक्रोश को भांपते हुए उन्होंने यह कदम उठाया है।
ईवीएम टेंपरिंग और हिंसा के बाद चुनाव आयोग ने लिया था कड़ा फैसला
गौरतलब है कि फॉलटा सीट पर बीते 29 अप्रैल को मतदान हुआ था, लेकिन इस दौरान बड़े पैमाने पर बूथ कैप्चरिंग, मतदाताओं को डराने-धमकाने और ईवीएम मशीनों से छेड़छाड़ के गंभीर आरोप लगे थे। इसके बाद चुनाव आयोग (ECI) ने कड़ा रुख अपनाते हुए फॉलटा के सभी 285 बूथों पर होने वाले मतदान को अमान्य घोषित कर दिया था और 21 मई को नए सिरे से पूरी विधानसभा में ‘री-पोलिंग’ का आदेश जारी किया था।
बीजेपी प्रत्याशी ने लगाया था गंभीर आरोप
इस सीट से भाजपा उम्मीदवार देबांशु पांडा ने आरोप लगाया था कि टीएमसी के गुंडों ने रात के अंधेरे में मतदाताओं के वोटर कार्ड और आधार कार्ड तक छीन लिए थे ताकि वे वोट न डाल सकें। स्थानीय ग्रामीणों और महिलाओं ने भी टीएमसी प्रत्याशी जहांगीर खान के करीबी करीबियों पर डराने-धमकाने का आरोप लगाते हुए भारी विरोध प्रदर्शन किया था।
क्या यही है ‘पुष्पा’ का अंदाज?
जहांगीर खान के इस आत्मसमर्पण के बाद विपक्षी दलों ने तंज कसना शुरू कर दिया है। सोशल मीडिया से लेकर जमीन तक विरोधी पूछ रहे हैं कि चुनावी मंचों से फिल्मी डायलॉग मारकर खुद को ‘पुष्पा’ बताने वाले जहांगीर खान आखिर पुनर्मतदान की निष्पक्ष कसौटी पर उतरने से पहले ही क्यों ‘झुक’ गए? उनके इस यू-टर्न ने न सिर्फ फॉलटा में टीएमसी की उम्मीदों को करारा झटका दिया है, बल्कि बंगाल की राजनीति में ‘बाहुबल’ के ढहते किले की कहानी भी बयां कर दी है।
– टुडे इंडिया न्यूज एमपी डेस्क




