सृजन संस्था की कार्यशाला में गूंजी आत्मनिर्भरता की कहानियाँ
डिप्टी कलेक्टर सुश्री स्वाति सिंह ने दीदियों के जज्बे और संघर्ष को सराहा

निवाड़ी।
जिला मुख्यालय स्थित विवेकानंद सभागार में सृजन (SRIJAN – Self-Reliant Initiatives through Joint Action) संस्था द्वारा ग्रामीण विकास एवं महिला सशक्तिकरण पर केंद्रित एक दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डिप्टी कलेक्टर सुश्री स्वाति सिंह रहीं। कार्यशाला में विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं ग्रामीण क्षेत्रों से आई बड़ी संख्या में महिला उद्यमी ‘दीदियाँ’ उपस्थित रहीं।
सफलता की कहानियों से मिली नई प्रेरणा
कार्यशाला का प्रमुख आकर्षण उन ग्रामीण महिलाओं की प्रेरक कहानियाँ रहीं, जिन्होंने सृजन संस्था के मार्गदर्शन में अपने जीवन की दिशा बदल दी। कृषि, बागवानी, पशुपालन एवं लघु उद्यमों से जुड़ी दीदियों ने मंच से अपने अनुभव साझा किए।

महिलाओं ने बताया कि आधुनिक तकनीकों, समूह आधारित कार्यप्रणाली और मूल्य श्रृंखला से जुड़ने के बाद उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। कई दीदियों ने भावुक होकर कहा कि आर्थिक आत्मनिर्भरता ने उन्हें आत्मविश्वास दिया और परिवार व समाज में सम्मानजनक पहचान दिलाई।
प्रशासनिक तालमेल और योजनाओं की जानकारी
कार्यशाला में उपस्थित विभिन्न विभागों के जिला अधिकारियों ने शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी।
अधिकारियों ने दीदियों को बताया कृषि एवं पशुपालन विभाग की योजनाओं का लाभ कैसे प्राप्त किया जाए,
सरकारी सब्सिडी एवं कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से आजीविका को कैसे सुदृढ़ किया जाए,
विभागीय योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन की प्रक्रिया क्या है।
“यह केवल आर्थिक नहीं, सामाजिक क्रांति है” — डिप्टी कलेक्टर।

डिप्टी कलेक्टर सुश्री स्वाति सिंह ने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा—

“ग्रामीण महिलाओं का आत्मनिर्भर होना केवल आर्थिक प्रगति नहीं, बल्कि एक सामाजिक क्रांति है।
‘सृजन’ जैसी संस्थाओं और शासन की योजनाओं के समन्वय से निवाड़ी की दीदियाँ आज अपने पैरों पर खड़ी हो रही हैं। प्रशासन इनके विकास के लिए हर स्तर पर प्रतिबद्ध है।”
सृजन संस्था की भूमिका
उल्लेखनीय है कि वर्ष 1997 में वेद आर्य द्वारा स्थापित सृजन संस्था देश के कई राज्यों में ग्रामीण गरीबों, विशेषकर महिलाओं के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए कार्य कर रही है।

निवाड़ी में आयोजित यह कार्यशाला इसी सतत प्रयास की एक कड़ी रही, जिसका उद्देश्य महिलाओं को एक साझा मंच प्रदान कर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ना है।



