पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत को रूस का भरोसा ।
तेल-गैस आपूर्ति बाधित होने पर पूरी मदद को तैयार मॉस्को, होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ी चिंता

मास्को, नईदिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ऊर्जा आपूर्ति पर मंडराते संकट के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। रूस ने स्पष्ट संकेत दिया है कि यदि तेल और गैस आपूर्ति में लंबे समय तक व्यवधान रहता है तो वह भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए तैयार है।
यह आश्वासन ऐसे समय आया है जब कतर में हालिया घटनाओं के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल एवं एलएनजी की कीमतों पर दबाव देखा जा रहा है।
कतर में उत्पादन ठप, बाजार में हलचल
दो मार्च को QatarEnergy ने रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी और मेसाईद इंडस्ट्रियल सिटी में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर ईरानी ड्रोन हमले के बाद तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) और संबंधित उत्पादों का उत्पादन अस्थायी रूप से रोक दिया।
रास लाफान विश्व के सबसे बड़े एलएनजी निर्यात हब में से एक है। उत्पादन ठप होने से एशियाई बाजार, विशेषकर भारत, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे आयातक देशों में चिंता बढ़ गई है।

मॉस्को का स्पष्ट संदेश: “भारत को ऊर्जा की कमी नहीं होने देंगे”
रूस के दूतावास के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को कहा कि यदि ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान जारी रहता है तो रूस भारत की जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार है।
राष्ट्रपति Vladimir Putin के नेतृत्व में रूस पहले ही भारत को रियायती दरों पर कच्चा तेल उपलब्ध करा रहा है। प्रधानमंत्री Narendra Modi और रूसी नेतृत्व के बीच ऊर्जा सहयोग पिछले दो वर्षों में काफी मजबूत हुआ है।
यूक्रेन संकट के बाद भारत ने रूस से तेल आयात में उल्लेखनीय वृद्धि की है, जिससे भारत को वैश्विक मूल्य अस्थिरता से काफी हद तक राहत मिली।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट की छाया
ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता तब और बढ़ गई जब ईरान ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण जलमार्ग Strait of Hormuz को अवरुद्ध कर दिया।
होर्मुज जलडमरूमध्य से विश्व के कुल समुद्री तेल व्यापार का लगभग एक-तिहाई हिस्सा गुजरता है। भारत अपने कच्चे तेल और एलएनजी आयात का बड़ा भाग इसी मार्ग से प्राप्त करता है। ऐसे में किसी भी अवरोध का सीधा असर भारतीय ऊर्जा सुरक्षा और घरेलू कीमतों पर पड़ सकता है।
भारत की रणनीति: विविधीकरण और दीर्घकालिक अनुबंध
भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी ऊर्जा रणनीति में बड़ा बदलाव किया है।
रूस से तेल आयात में वृद्धि
दीर्घकालिक एलएनजी अनुबंध
सामरिक पेट्रोलियम भंडार का विस्तार
नवीकरणीय ऊर्जा पर जोर
रूस के साथ मजबूत होते ऊर्जा संबंधों ने भारत को विकल्प उपलब्ध कराए हैं, जिससे पश्चिम एशिया में अस्थिरता का प्रभाव सीमित करने में मदद मिल सकती है।
वैश्विक बाजार पर असर
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबा खिंचता है और होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही बाधित रहती है, तो कच्चे तेल और गैस की कीमतों में तेज उछाल संभव है। इससे वैश्विक महंगाई और आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।
निष्कर्ष
पश्चिम एशिया के मौजूदा संकट के बीच रूस का आश्वासन भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए भारत सरकार लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और वैकल्पिक आपूर्ति मार्गों पर भी विचार कर रही है।
ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर आने वाले दिनों में वैश्विक घटनाक्रम भारत की आर्थिक स्थिरता के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं।




