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​पश्चिम एशिया संकट: PM मोदी की हाई-लेवल मीटिंग, खाद और तेल की निर्बाध सप्लाई के लिए बना ‘एक्शन प्लान’

​ग्लोबल सप्लाई चेन पर मंडराते खतरे के बीच भारत सतर्क; प्रधानमंत्री ने वरिष्ठ मंत्रियों के साथ की समीक्षा, रणनीतिक भंडार के इस्तेमाल पर भी चर्चा

​नई दिल्ली: पश्चिम एशिया (West Asia) में गहराते भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध की आहट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारत की अर्थव्यवस्था, विशेष रूप से ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का आकलन करना था।

​बैठक के मुख्य बिंदु और रणनीतिक फैसले:

    • ​सप्लाई चेन की सुरक्षा: प्रधानमंत्री ने निर्देश दिया कि ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर भारत में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पर नहीं पड़ना चाहिए।
    • ​ऊर्जा संकट पर नज़र: कच्चे तेल (Crude Oil) और प्राकृतिक गैस की कीमतों में संभावित उछाल को देखते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय को वैकल्पिक आयात मार्गों और स्रोतों को सक्रिय रखने के निर्देश दिए गए हैं।
    • ​खाद और उर्वरक: कृषि प्रधान देश होने के नाते, सरकार की प्राथमिकता उर्वरकों (Fertilizers) की उपलब्धता सुनिश्चित करना है ताकि बुवाई सीजन और किसानों पर कोई वित्तीय बोझ न पड़े।
    • ​रणनीतिक भंडार (Strategic Reserves): सूत्रों के अनुसार, बैठक में आपात स्थिति में भारत के रणनीतिक तेल भंडार का उपयोग करने और अन्य देशों से आयात बढ़ाने जैसे विकल्पों पर भी गहन मंथन हुआ।

​”सरकार हर स्थिति पर बारीकी से नजर रख रही है। हमारा प्राथमिक लक्ष्य घरेलू बाजार में कीमतों को स्थिर रखना और आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को मजबूत बनाए रखना है।” – सरकारी सूत्र

 

​भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता?

​विशेषज्ञों के अनुसार, भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आयात करता है। इस क्षेत्र में अस्थिरता का सीधा अर्थ है:

      1. ​कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि: जिससे घरेलू स्तर पर पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं।
      2. ​माल ढुलाई (Logistics) में देरी: समुद्री मार्गों में तनाव से व्यापारिक जहाजों का आवागमन प्रभावित हो सकता है।
      3. ​मुद्रास्फीति (Inflation): आयात महंगा होने से अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका है।

​प्रधानमंत्री की यह सक्रियता दर्शाती है कि सरकार किसी भी वैश्विक संकट से निपटने के लिए ‘प्रो-एक्टिव’ मोड में है और देश की आर्थिक सुरक्षा को प्राथमिकता दे रही है।

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