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​एमपी के दो जिलों में 89 किमी लंबी नहर के लिए 1157 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण शुरू

​केन-बेतवा लिंक परियोजना: टीकमगढ़ और निवाड़ी के किसानों को मिलेगा मुआवजा, साल के अंत तक धरातल पर उतरेगी योजना

टीकमगढ़/निवाड़ी:

मध्य प्रदेश की बहुप्रतीक्षित और महत्वाकांक्षी केन-बेतवा लिंक परियोजना अब निर्णायक चरण में पहुंच गई है। बुंदेलखंड की प्यास बुझाने के लिए तैयार की गई इस योजना के तहत टीकमगढ़ और निवाड़ी जिलों में 89 किलोमीटर लंबी नहर के निर्माण हेतु 1157 हेक्टेयर जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया आधिकारिक रूप से शुरू कर दी गई है। प्रशासन ने जमीन अधिग्रहण के लिए आवश्यक धारा 11 का प्रकाशन कर दिया है, जिससे अब इस प्रोजेक्ट में तेजी आने की उम्मीद है।

जमीन अधिग्रहण का गणित: कहां कितनी भूमि?

​परियोजना के तहत कुल 1157 हेक्टेयर जमीन ली जानी है, जिसमें निजी कृषि भूमि और शासकीय भूमि दोनों शामिल हैं। प्रशासन ने अधिग्रहण को पारदर्शी बनाने के लिए विस्तृत ब्यौरा जारी किया है:

जिला

नहर की लंबाई

कुल अधिग्रहित भूमि

मुख्य विवरण

टीकमगढ़

73.556 किमी

956.224 हेक्टेयर

602.67 हेक्टेयर निजी कृषि भूमि शामिल

निवाड़ी

15.527 किमी

191.500 हेक्टेयर

131.935 हेक्टेयर निजी कृषि भूमि शामिल

नोट: अधिग्रहण में निजी कृषि भूमि के साथ 30 प्रतिशत अतिरिक्त भूमि और शासकीय भूमि का हिस्सा भी शामिल किया गया है।

चार माह में पूरी होगी प्रक्रिया

​केन-बेतवा लिंक परियोजना के एसडीओ रजनीश तिवारी के अनुसार, धारा 11 के तहत जमीन की जानकारी सार्वजनिक कर संबंधित किसानों और विभागों को सूचित कर दिया गया है।

  • अगला कदम: प्रशासन अब धारा 19 की तैयारी में है। इसके बाद धारा 21 के तहत फाइनल अधिसूचना जारी होगी।
  • मुआवजा और टेंडर: अधिसूचना के बाद किसानों को मुआवजा वितरित किया जाएगा और फिर नहर निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू होगी।
  • समय सीमा: उम्मीद जताई जा रही है कि अगले 4 महीनों में अधिग्रहण की कागजी कार्रवाई पूरी हो जाएगी और साल के अंत तक नहर का काम जमीन पर शुरू हो जाएगा।

सिंचाई का नया ढांचा: 12 तालाबों को मिलेगी संजीवनी

​यह नहर केवल पानी का बहाव नहीं, बल्कि क्षेत्र की कृषि के लिए लाइफलाइन साबित होगी।

  • पंप हाउस: टीकमगढ़ जिले में 4 बड़े पंप हाउस बनाए जाएंगे।
  • तालाबों का जुड़ाव: इस नहर के जरिए क्षेत्र के एक दर्जन (12) तालाबों को भरा जाएगा।
  • सिंचाई क्षमता: योजना के पूर्ण होने से लगभग 50 हजार हेक्टेयर (संभावित) जमीन सिंचित हो सकेगी। विभाग अन्य स्थानीय तालाबों को भी इस नेटवर्क से जोड़ने की योजना पर विचार कर रहा है।

बुंदेलखंड के लिए क्यों है खास?

​केन-बेतवा लिंक परियोजना का मुख्य उद्देश्य केन नदी के अधिशेष जल को बेतवा बेसिन में डाइवर्ट करना है। इससे न केवल सिंचाई सुविधा बढ़ेगी, बल्कि भू-जल स्तर में भी सुधार होगा, जो लंबे समय से सूखे की मार झेल रहे टीकमगढ़ और निवाड़ी के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।

रिपोर्ट: टुडे इंडिया न्यूज, एमपी डेस्क

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