5 लाख कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत की खबर… नियमितीकरण पर हाईकोर्ट का बड़ा आदेश
हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: 10 साल सेवा पूरी करने वाले संविदा और आउटसोर्स कर्मचारी भी होंगे नियमित, सरकार की अपील खारिज

भोपाल (टुडे इंडिया न्यूज़ एमपी): मध्यप्रदेश के करीब 5 लाख संविदा, आउटसोर्स और अंशकालिक कर्मचारियों के लिए न्याय के गलियारों से एक बड़ी और सुखद खबर सामने आई है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की डबल बेंच ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया है कि 10 साल की सेवा पूरी कर चुके कर्मचारियों को नियमितीकरण के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता।
न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की खंडपीठ ने राज्य सरकार की उस अपील को खारिज कर दिया है, जिसमें एकल पीठ के आदेश को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि जिस प्रकार दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को स्थायी श्रेणी (Classification) का लाभ दिया जाता है, उसी प्रकार संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों को भी इसका लाभ मिलना चाहिए।
फैसले की मुख्य बातें:
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- समानता का अधिकार: कोर्ट ने माना कि संविदा या आउटसोर्स के आधार पर भेदभाव करना उचित नहीं है, यदि कर्मचारी ने 10 साल से अधिक समय तक विभाग को सेवाएं दी हैं।
- न्यूनतम वेतनमान: अदालत ने आदेश दिया है कि इन कर्मचारियों को उनके पद के अनुरूप न्यूनतम वेतनमान (Minimum Pay Scale) और अन्य भत्ते दिए जाएं।
- नियमितीकरण का रास्ता साफ: 10 साल की निरंतर सेवा पूरी करने वाले कर्मचारी अब नियमितीकरण और स्थायी वर्गीकरण के हकदार होंगे।
- सरकार को झटका: राज्य सरकार की उस दलील को कोर्ट ने सिरे से नकार दिया जिसमें कहा गया था कि संविदा कर्मचारियों पर स्थायीकरण की नीति लागू नहीं होती।
विशेष टिप्पणी: “न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि केवल नियुक्ति का स्वरूप अलग होने के कारण कर्मचारियों को उनके आजीविका के अधिकार और उचित पारिश्रमिक से वंचित नहीं रखा जा सकता।”
कर्मचारी संगठनों में खुशी की लहर
इस फैसले के बाद प्रदेश के बिजली विभाग, स्वास्थ्य विभाग और अन्य सरकारी महकमों में कार्यरत लाखों कर्मचारियों में उत्साह है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि यह उनकी वर्षों की तपस्या और संघर्ष की जीत है। अब गेंद सरकार के पाले में है कि वह इस आदेश को कितनी जल्दी लागू करती है।




