मध्य प्रदेश में फिर सक्रिय होंगे RTO चेक पोस्ट, हाई कोर्ट का सरकार को सख्त आदेश
30 दिनों के भीतर सभी चेक पोस्ट शुरू करने का निर्देश; अवैध वसूली की शिकायतों के बीच कोर्ट का अहम फैसला

जबलपुर/भोपाल:
मध्य प्रदेश में परिवहन विभाग के चेक पोस्टों को लेकर चल रही लंबी खींचतान पर आज मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक बड़ा और निर्णायक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रदेश की सीमाओं पर बंद किए गए सभी RTO चेक पोस्ट 30 दिनों के भीतर दोबारा शुरू किए जाएं।
क्या है पूरा मामला?
पिछले साल भ्रष्टाचार और अवैध वसूली की शिकायतों के बाद राज्य सरकार ने प्रदेश के सभी 45 परिवहन चेक पोस्टों को बंद करने का निर्णय लिया था। सरकार का तर्क था कि इससे परिवहन सुगम होगा और भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी। हालांकि, इस फैसले को जनहित याचिका के माध्यम से कोर्ट में चुनौती दी गई थी।
हाई कोर्ट का रुख
जस्टिस विशाल मिश्रा की बेंच ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि चेक पोस्टों का बंद होना नियमन और सुरक्षा के लिहाज से उचित नहीं है। कोर्ट ने निम्नलिखित मुख्य बातें कहीं:
- राजस्व और सुरक्षा: चेक पोस्ट बंद होने से न केवल राजस्व की हानि हो रही है, बल्कि बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों की निगरानी भी प्रभावित हुई है।
- समय सीमा: सरकार को आगामी 30 दिनों के भीतर सभी बुनियादी ढांचे के साथ चेक पोस्टों को क्रियाशील (Operational) करना होगा।
- पारदर्शिता: कोर्ट ने यह भी संकेत दिया है कि नई व्यवस्था में पारदर्शिता और तकनीक का उपयोग किया जाए ताकि पुरानी शिकायतों (अवैध वसूली) की पुनरावृत्ति न हो।
चेक पोस्ट बंद होने से बढ़ी थी परेशानी
परिवहन विशेषज्ञों का मानना है कि चेक पोस्ट बंद होने के बाद ओवरलोडिंग और बिना परमिट के चलने वाले वाहनों की संख्या में भारी इजाफा हुआ था। वहीं, ट्रांसपोर्टर्स ने इस फैसले पर मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है; कुछ ने इसे सुरक्षा के लिए जरूरी बताया है, तो कुछ को डर है कि “वसूली राज” फिर से शुरू न हो जाए।
न्यूज अपडेट: राज्य सरकार अब इस आदेश के बाद विभाग को नई गाइडलाइंस जारी करने की तैयारी कर रही है। देखना होगा कि क्या सरकार इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाती है या तय समय सीमा में चेक पोस्ट शुरू करती है।
रिपोर्ट: टुडे इंडिया न्यूज़ डेस्क, मध्य प्रदेश




