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रामावतार जग्गी हत्याकांड में अमित जोगी को उम्रकैद, हाई कोर्ट ने पलटा निचली अदालत का फैसला

​अमित जोगी को 3 हफ्ते में सरेंडर करने का निर्देश, 2007 में मिली 'संदेह के लाभ' की राहत हुई खत्म

बिलासपुर/रायपुर:

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में 21 साल बाद एक बड़ा कानूनी मोड़ आया है। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे और जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के नेता अमित जोगी को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

हाई कोर्ट का सख्त रुख

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की डिवीजन बेंच ने 2007 के ट्रायल कोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया है, जिसमें अमित जोगी को ‘संदेह का लाभ’ (benefit of doubt) देते हुए बरी किया गया था। हाई कोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार और जग्गी परिवार की अपील पर सुनवाई करते हुए यह ऐतिहासिक निर्णय दिया।

3 हफ्तों का अल्टीमेटम

अदालत ने अमित जोगी को कड़ी चेतावनी देते हुए तीन हफ्तों के भीतर आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया है। कोर्ट के इस फैसले के बाद प्रदेश की सियासत में हलचल तेज हो गई है।

क्या था मामला?

  • साल 2003: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के कद्दावर नेता रामावतार जग्गी की सरेराह गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
  • आरोप: इस हत्याकांड के पीछे राजनीतिक साजिश का आरोप लगा था।
  • ट्रायल कोर्ट का फैसला: 2007 में ट्रायल कोर्ट ने अन्य 28 आरोपियों को तो सजा सुनाई थी, लेकिन अमित जोगी को बरी कर दिया था।

​अब हाई कोर्ट के इस फैसले ने साफ कर दिया है कि कानून की नजर में कोई भी व्यक्ति पद या रसूख के आधार पर बच नहीं सकता। जग्गी परिवार ने इस फैसले को ‘सत्य की जीत’ बताया है।

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