आधार और वोटर आईडी जन्म प्रमाण पत्र नहीं माने जा सकते: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट
जबलपुर से आई अहम कानूनी स्पष्टता, उम्र संबंधी मामलों में होगा सीधा असर

निवाड़ी,जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि आधार कार्ड और मतदाता पहचान पत्र (वोटर आईडी) को जन्म प्रमाण पत्र के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने कहा कि ये दस्तावेज़ केवल पहचान और पते की पुष्टि के लिए होते हैं, न कि जन्म तिथि के प्राथमिक साक्ष्य के रूप में।
अदालत का स्पष्ट मत

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि आधार और वोटर आईडी में दर्ज जन्मतिथि प्रायः आवेदक द्वारा दी गई जानकारी या अन्य द्वितीयक दस्तावेज़ों पर आधारित होती है।
इस कारण इन्हें आयु निर्धारण का निर्णायक प्रमाण नहीं माना जा सकता।
जन्म तिथि के लिए कौन से दस्तावेज़ मान्य

न्यायालय के अनुसार जन्म तिथि प्रमाणित करने के लिए निम्न दस्तावेज़ अधिक विश्वसनीय और मान्य हैं—
नगर निगम / नगर पालिका / ग्राम पंचायत द्वारा जारी जन्म प्रमाण पत्र
स्कूल का प्रथम प्रवेश रजिस्टर
मैट्रिक या समकक्ष परीक्षा का प्रमाण पत्र, यदि वह मूल रिकॉर्ड पर आधारित हो
इन मामलों में पड़ेगा सीधा प्रभाव

हाईकोर्ट का यह निर्णय कई महत्वपूर्ण मामलों में असर डालेगा—सरकारी नौकरी एवं सेवा विवाद
आयु सीमा से जुड़े प्रकरण
पेंशन एवं अनुकंपा नियुक्ति
आपराधिक मामलों में आरोपी की उम्र निर्धारण
चुनावी पात्रता से जुड़े विवाद
आम नागरिकों के लिए जरूरी संदेश
अदालत के इस फैसले से स्पष्ट है कि

केवल पहचान से जुड़े दस्तावेज़ उम्र का कानूनी प्रमाण नहीं हो सकते।
ऐसे में नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे भविष्य की किसी भी कानूनी या शासकीय प्रक्रिया के लिए आधिकारिक जन्म प्रमाण पत्र अवश्य बनवाएं और सुरक्षित रखें।
![]()
कानूनी दृष्टि से अहम फैसला।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय प्रशासनिक और न्यायिक प्रक्रियाओं में दस्तावेज़ों की विश्वसनीयता तय करने में मार्गदर्शक सिद्ध होगा।




