दिल्ली के जंतर-मंतर पर ‘क्रांति’ का शोर, लेकिन रांची के छात्र आंदोलन पर ‘सन्नाटा’ क्यों?
JPSC-JSSC परीक्षा धांधली के खिलाफ सड़कों व भूख हड़ताल पर डटे हजारों युवा; राष्ट्रीय मंचों और मीडिया के दोहरे रवैये पर उठे गंभीर सवाल

टुडे इंडिया न्यूज एमपी (Today India News MP)
भोपाल/रांची: देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर जब भी किसी मुद्दे को लेकर छात्र आंदोलन या प्रदर्शन की सुगबुगाहट होती है, तो वह राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चा का केंद्र बन जाता है। लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि झारखंड की राजधानी रांची में परीक्षा धांधली और भ्रष्टाचार के खिलाफ हजारों छात्रों द्वारा चलाए जा रहे ‘सत्याग्रह’ और अनशन पर संपूर्ण शांति क्यों बनी हुई है?
रांची में क्यों फूटा युवाओं का गुस्सा?
झारखंड लोक सेवा आयोग (14वीं JPSC) और JSSC परीक्षा परिणामों में कथित OMR शीट में हेरफेर, ब्लैकलिस्टेड कंपनियों को ठेका देने और व्यापक अनियमितताओं के आरोप लगे हैं।
- बेमियादी भूख हड़ताल: छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम और बापू वाटिका में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं।
- मौसम की मार के बीच टिके छात्र: मूसलाधार बारिश और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद हजारों अभ्यर्थी दिन-रात सड़कों पर डटे हुए हैं।
राष्ट्रीय चुप्पी पर क्यों उठ रहे सवाल?
जंतर-मंतर पर उठने वाली हर आवाज को ‘युवा क्रांति’ का नाम देने वाले राष्ट्रीय संगठन, बड़े विश्लेषक और मीडिया घराने रांची में चल रहे इस व्यापक Gen-Z आंदोलन पर खामोशी साधे हुए हैं।
- दोहरा मापदंड: दिल्ली केंद्रित प्रदर्शनों को तुरंत राष्ट्रीय समर्थन मिलता है, जबकि राज्यों (टियर-2 और टियर-3 शहरों) में प्रशासनिक भ्रष्टाचार से जूझ रहे छात्रों की आवाज को दबा दिया जाता है।
- चुनिंदा सहानुभूति: बड़े राष्ट्रीय एक्टिविस्ट और छात्र संगठन जंतर-मंतर के मंचों से तो लंबे-चौड़े भाषण देते हैं, लेकिन रांची में भूख हड़ताल पर बैठे अभ्यर्थियों की सुध लेने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं।
- सरकारी ढर्रा: राज्य सरकार ने सीआईडी जांच के आदेश दिए हैं और मुख्य परीक्षा को फिलहाल टाल दिया है, लेकिन छात्र निष्पक्ष एजेंसी से जांच की मांग कर रहे हैं।
छात्रों की 5 मुख्य मांगे।
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क्रम
मांग का विषय
प्रमुख बिंदु
1
परीक्षा रद्द करना
14वीं JPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा को तुरंत रद्द किया जाए।
2
CBI जांच
CID की जगह केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) से पूरे धांधली मामले की जांच हो।
3
ब्लैकलिस्टेड कंपनियां बाहर
TDPL जैसी दागी और ब्लैकलिस्टेड कंपनियों को परीक्षा संचालन से पूरी तरह हटाया जाए।
4
OMR में सुधार
ओएमआर शीट में छेड़छाड़ रोकने के लिए 5वां ‘Not Attempted’ विकल्प जोड़ा जाए।
5
पारदर्शिता
जिम्मेदार अधिकारियों के हस्ताक्षर युक्त कट-ऑफ और पारदर्शी मेरिट लिस्ट जारी की जाए।
निष्कर्ष
रांची का यह छात्र आंदोलन केवल एक परीक्षा को रद्द कराने की लड़ाई नहीं है, बल्कि देश की प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ युवाओं का सीधा मोर्चा है। जंतर-मंतर की ‘क्रांति’ पर दिन-रात बहस करने वाले सिस्टम को अब यह समझना होगा कि रांची की सड़कों पर जाग रहे युवाओं का दर्द भी उतना ही अहम है जितना देश के किसी अन्य कोने का।




