एथेनॉल ब्लेंडिंग पर घिरा विपक्ष! 2005 का मणि शंकर अय्यर का संसद वाला पुराना वीडियो हुआ वायरल, कांग्रेस के रुख पर उठे सवाल
संसद के पटल पर तत्कालीन पेट्रोलियम मंत्री मणि शंकर अय्यर का एथेनॉल मिश्रण को सरकार की प्राथमिकता बताने वाला पुराना बयान फिर से सुर्खियों में आ गया है, जिससे राजनीतिक गलियारों में बहस छिड़ गई है।

टुडे इंडिया न्यूज एमपी
नईदिल्ली :-
देश में पेट्रोल के साथ एथेनॉल ब्लेंडिंग (Ethanol Blending) की नीति को लेकर चल रही राजनीतिक बयानबाजी के बीच यूपीए सरकार के समय का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वायरल वीडियो में तत्कालीन पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री मणि शंकर अय्यर संसद में एथेनॉल मिश्रण के पुरजोर समर्थक के रूप में नजर आ रहे हैं। इस पुराने बयान के सामने आने के बाद अब कांग्रेस पार्टी के मौजूदा रुख को लेकर तीखे सवाल खड़े होने लगे हैं।
क्या था मणि शंकर अय्यर का 2005 का बयान?
वर्ष 2005 में संसद के पटल पर बोलते हुए तत्कालीन पेट्रोलियम मंत्री मणि शंकर अय्यर ने एथेनॉल-ब्लेंडेड पेट्रोल कार्यक्रम की पुरजोर वकालत की थी। उन्होंने सदन को बताया था कि सरकार वैकल्पिक और नवीकरणीय ईंधनों को बढ़ावा देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। अय्यर ने कहा था कि गन्ने के किसानों को समर्थन देने और आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने के लिए पेट्रोल में एथेनॉल का मिश्रण एक दूरदर्शी कदम है। उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि जैसे-जैसे देश में एथेनॉल की उपलब्धता बढ़ेगी, सरकार इसके मिश्रण के दायरे को और बढ़ाने से पीछे नहीं हटेगी।
मौजूदा राजनीतिक बहस और कांग्रेस की नीति पर सवाल
हाल ही में जब कांग्रेस नेतृत्व द्वारा मौजूदा सरकार की ई-20 एथेलॉल ब्लेंडिंग नीति और इसके कथित प्रभावों को लेकर तीखा हमला बोला गया, तो सोशल मीडिया पर आलोचकों ने 2005 का यह वीडियो निकालकर सामने रख दिया। जानकारों का कहना है कि जिस नीति की नींव पिछली यूपीए सरकार के दौरान खुद मंत्रियों द्वारा संसद में मजबूत ढंग से रखी गई थी, आज उस पर सवाल उठाना राजनीतिक विरोधाभास को जन्म देता है।
सत्तारूढ़ दल के समर्थकों का तर्क है कि वर्तमान सरकार एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम को उसी पुरानी रूपरेखा के आधार पर आगे बढ़ा रही है, जिससे देश को ऊर्जा सुरक्षा और कृषि क्षेत्र को मजबूती मिल सके। बहरहाल, इस पुराने बयान के वायरल होने के बाद से राजनीतिक मंचों पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है और कांग्रेस के नीतिगत रुख पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।




