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SC-ST और OBC आयोग की तर्ज पर ‘सवर्ण समाज आयोग’ के गठन की मांग, BJP सांसदों ने केंद्रीय मंत्रियों से की मुलाकात

​जब अन्य वर्गों के लिए हो सकते हैं आयोग, तो सवर्ण आयोग क्यों नहीं? सांसदों की मांग पर केंद्रीय मंत्रियों ने सरकार के समक्ष विचार रखने का दिया भरोसा।

टुडे इंडिया न्यूज एमपी

नई दिल्ली:

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कुछ सांसदों ने केंद्र सरकार के समक्ष सवर्ण समाज के लिए एक अलग और स्वतंत्र केंद्रीय आयोग के गठन की जोरदार मांग उठाई है। सांसदों का तर्क है कि देश में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के हितों की रक्षा के लिए जिस प्रकार संवैधानिक और वैधानिक आयोगों का प्रावधान है, उसी तर्ज पर ‘सवर्ण समाज आयोग’ का भी गठन किया जाना चाहिए।

वरिष्ठ मंत्रियों और नेतृत्व से मुलाकात

इस सिलसिले में भाजपा के सांसदों ने दिल्ली में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों (जिसमें पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के साथ मुलाकात भी शामिल है) से संपर्क किया है। सांसदों ने पक्ष रखा कि सवर्ण समाज के भीतर भी एक बड़ा तबका ऐसा है जो आर्थिक तंगी और पिछड़ेपन से जूझ रहा है। आर्थिक रूप से कमजोर (EWS) वर्ग के लोगों के हितों, आरक्षण के प्रभावी क्रियान्वयन और उनके अधिकारों की सुरक्षा के लिए एक संस्थागत व्यवस्था होना अनिवार्य है।

बिहार मॉडल का हवाला

चर्चा के दौरान सांसदों ने उदाहरण देते हुए कहा कि जब बिहार जैसे राज्यों में सवर्ण आयोग जैसी व्यवस्थाएं पहले से ही अस्तित्व में हैं, तो राष्ट्रीय स्तर पर भी केंद्रीय आयोग का गठन किया जाना पूरी तरह प्रासंगिक है। उनका मानना है कि इससे समाज के इस वर्ग में लंबे समय से चली आ रही आशंकाओं और समस्याओं का सुनियोजित समाधान मिल सकेगा।

केंद्रीय मंत्रियों का आश्वासन

सांसदों द्वारा रखे गए इस प्रस्ताव को सुनने के बाद सरकार के नुमाइंदों और केंद्रीय मंत्रियों ने इस पूरे विचार को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार के उच्च स्तर के समक्ष रखने का आश्वासन दिया है। हालांकि, इस पर सरकार की तरफ से अभी कोई औपचारिक नीतिगत फैसला नहीं आया है, लेकिन इस मांग के सार्वजनिक होने से राजनीतिक गलियारों में सुगबुगाहट तेज हो गई है।

राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज

आगामी विधानसभा चुनावों (विशेषकर उत्तर प्रदेश के संदर्भ में) के मद्देनजर इस मांग को काफी अहम माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनाव से ठीक पहले सवर्ण आयोग के गठन की सुगबुगाहट समाज के इस वर्ग को साधने और उनकी नाराजगी दूर करने की एक बड़ी राजनीतिक कवायद हो सकती है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि केंद्र सरकार इस मांग पर आगे क्या रुख अपनाती है।

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