झारखंड में पारदर्शी परीक्षा की मांग कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज: JMM-कांग्रेस सरकार के खिलाफ फूटा युवाओं का गुस्सा
हक मांगने पर मिलीं लाठियां और जख्म; छात्र संगठनों का ऐलान— 'दबाई नहीं जा सकती हक की आवाज, जारी रहेगा आंदोलन

रांची/भोपाल (टुडे इंडिया न्यूज एमपी):
झारखंड में पारदर्शी चयन प्रक्रिया और प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली रोकने की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे आंदोलित छात्रों पर हुए पुलिस लाठीचार्ज के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया है। शांतिपूर्ण ढंग से अपना हक मांग रहे युवाओं पर हुई इस कार्रवाई को लेकर JMM और कांग्रेस नीत गठबंधन सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
पारदर्शी परीक्षा की मांग पर पुलिसिया कार्रवाई
झारखंड में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और समयबद्ध भर्ती की मांग को लेकर छात्र लंबे समय से आंदोलनरत हैं। प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि वे केवल निष्पक्ष परीक्षा और अपने भविष्य की सुरक्षा की मांग कर रहे थे, लेकिन संवाद स्थापित करने के बजाय प्रशासन ने बल प्रयोग का रास्ता चुना। लाठीचार्ज में कई छात्र घायल हुए हैं, जिन्हें नजदीकी अस्पतालों में उपचार के लिए ले जाया गया।
मुख्य बिंदु एवं छात्रों की प्रमुख मांगें:
- पारदर्शी चयन प्रक्रिया: भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी और धांधली पर पूर्ण विराम लगाया जाए।
- दोषियों पर कार्रवाई: पेपर लीक और अनियमितताओं में शामिल तत्वों पर कठोर कानूनी कार्रवाई हो।
- दमनकारी नीति का विरोध: शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हुए लाठीचार्ज की निष्पक्ष जांच की जाए और जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो।
JMM-कांग्रेस सरकार की नाकामी पर उठे सवाल
छात्रों और युवा संगठनों का आरोप है कि यह घटना राज्य सरकार की प्रशासनिक विफलता और युवाओं के प्रति संवेदनहीनता को दर्शाती है। अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार रोजगार और न्याय देने में असमर्थ साबित हो रही है और जब युवा अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाते हैं, तो उन्हें लाठियों के दम पर दबाने का प्रयास किया जाता है।
’हक की लड़ाई रोकी नहीं जा सकती’
लाठीचार्ज की इस घटना के बाद छात्र संगठनों में आक्रोश और गहरा गया है। आंदोलित युवाओं का स्पष्ट कहना है कि पुलिस बल और जख्मों के जरिए उनकी आवाज को कुछ समय के लिए दबाया तो जा सकता है, लेकिन अपने अधिकारों और भविष्य के लिए शुरू की गई इस लड़ाई को रोका नहीं जा सकता। विभिन्न युवा संगठनों ने चेतावनी दी है कि जब तक पारदर्शी परीक्षा प्रणाली लागू नहीं की जाती, तब तक यह आंदोलन चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा।




