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​देश की पहली डिजिटल जनगणना: 2027 में 4 चरणों में होगा महाअभियान, जानें कैसे घर बैठे खुद भर सकेंगे अपनी जानकार

​देश की पहली डिजिटल जनगणना: 2027 में 4 चरणों में होगा महाअभियान, जानें कैसे घर बैठे खुद भर सकेंगे अपनी जानकार

नई दिल्ली/भोपाल। भारत में होने वाली आगामी जनगणना को लेकर केंद्र सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने आज एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान देश की 16वीं जनगणना का पूरा खाका पेश किया। उन्होंने बताया कि साल 2027 की यह जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी और इसे चार मुख्य चरणों में संपन्न किया जाएगा। इस बार की सबसे बड़ी खासियत ‘सेल्फ एन्यूमरेशन’ (स्व-गणना) की सुविधा है, जिससे नागरिक खुद अपना डेटा पोर्टल पर दर्ज कर सकेंगे।

इन 4 चरणों में पूरी होगी प्रक्रिया

​जनगणना आयुक्त के अनुसार, इस विशाल राष्ट्रीय अभियान को व्यवस्थित रखने के लिए इसे चार चरणों में बांटा गया है:

  1. पहला चरण (स्व-गणना): इस चरण में नागरिकों को अपना डेटा खुद भरने का मौका मिलेगा। एक विशेष पोर्टल के जरिए वोटर अपनी और अपने परिवार की जानकारी डिजिटल फॉर्म में खुद दर्ज करेंगे। इसे ‘सेल्फ एन्यूमरेशन’ नाम दिया गया है।
  2. दूसरा चरण (सत्यापन): स्व-गणना के तहत दी गई जानकारी को वेरिफाई करने के लिए चुनाव कर्मचारी और प्रगणक (Enumerators) घर-घर जाएंगे। वे चेक करेंगे कि पोर्टल पर दी गई जानकारी सही है या नहीं।
  3. तीसरा चरण (क्रॉस-चेकिंग): प्राप्त डेटा की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए उसे क्रॉस-चेक किया जाएगा। इसमें तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर डेटा का मिलान किया जाएगा ताकि कोई त्रुटि न रहे।
  4. चौथा चरण (व्यक्तिगत डेटा संग्रह): अंतिम चरण में उन व्यक्तिगत जानकारियों को जुटाया जाएगा जो नीति निर्धारण के लिए आवश्यक हैं। इसमें सामाजिक और आर्थिक पहलुओं से जुड़े सवाल भी शामिल हो सकते हैं।

डिजिटल जनगणना से बढ़ेगी पारदर्शिता

​मृत्युंजय कुमार नारायण ने बताया कि इस बार कागज-कलम का उपयोग कम से कम होगा। मोबाइल ऐप और वेब पोर्टल के जरिए डेटा सीधे सर्वर पर अपलोड होगा। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि गणना के परिणाम भी जल्द घोषित किए जा सकेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि नागरिकों द्वारा दी गई व्यक्तिगत जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी और इसका उपयोग केवल सांख्यिकीय उद्देश्यों के लिए होगा।

मध्य प्रदेश में भी व्यापक तैयारियां

​लोकसभा और विधानसभा चुनावों के डेटा के साथ समन्वय करते हुए, मध्य प्रदेश में भी इस जनगणना को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। राज्य के लाखों कर्मचारियों को इस डिजिटल प्रक्रिया के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा।

“यह दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल एक्सरसाइज होगी। तकनीक के इस्तेमाल से हम हर नागरिक तक आसानी से पहुँच सकेंगे और डेटा में होने वाली मानवीय गलतियों को कम कर सकेंगे।” > — मृत्युंजय कुमार नारायण, जनगणना आयुक्त

 

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