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समान नागरिक संहिता लागू करने का समय आ गया: सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा— देश में एक समान कानून की दिशा में गंभीरता से कदम उठाने की जरूरत

नई दिल्ली। देश में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC) को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि देश में समान नागरिक संहिता लागू करने के विषय पर गंभीरता से विचार करने का समय आ गया है।

अदालत ने कहा कि भारत जैसे लोकतांत्रिक और विविधता वाले देश में नागरिकों के लिए कानून के समक्ष समानता बेहद जरूरी है। अलग-अलग समुदायों के लिए अलग पर्सनल लॉ होने से कई बार न्याय और समान अधिकारों से जुड़े सवाल उठते हैं। इसलिए एक समान नागरिक कानून की दिशा में पहल पर चर्चा आवश्यक है।

क्या है समान नागरिक संहिता (UCC)
समान नागरिक संहिता का मतलब है कि देश के सभी नागरिकों पर शादी, तलाक, गोद लेना, उत्तराधिकार और संपत्ति जैसे मामलों में एक ही कानून लागू हो, चाहे उनका धर्म या समुदाय कोई भी हो। अभी भारत में अलग-अलग धर्मों के लिए अलग पर्सनल लॉ लागू हैं।

संविधान में भी है उल्लेख
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में राज्य को यह निर्देश दिया गया है कि वह देश में नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता लागू करने का प्रयास करे। हालांकि यह नीति निदेशक तत्व है, इसलिए इसे लागू करना सरकार के विवेक पर निर्भर करता है।

पहले भी उठ चुका है मुद्दा
समान नागरिक संहिता का मुद्दा कई बार राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय रहा है। कुछ लोग इसे समानता और महिला अधिकारों के लिए जरूरी बताते हैं, जबकि कुछ समुदाय इसे धार्मिक परंपराओं में हस्तक्षेप मानते हैं।
फिलहाल क्या स्थिति
सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद एक बार फिर देश में UCC को लेकर बहस तेज होने की संभावना है। अब निगाहें इस बात पर होंगी कि केंद्र सरकार और राज्य सरकारें इस दिशा में आगे क्या कदम उठाती हैं।

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