ऐतिहासिक: उत्तराखंड के बाद अब गुजरात में भी ‘समान नागरिक संहिता’ को मंजूरी, विधानसभा में UCC बिल बहुमत से पास
7.5 घंटे की मैराथन बहस के बाद मुहर; शादी, तलाक और लिव-इन के लिए अब पूरे राज्य में होंगे समान नियम

ऐतिहासिक: उत्तराखंड के बाद अब गुजरात में भी ‘समान नागरिक संहिता’ को मंजूरी, विधानसभा में UCC बिल बहुमत से पास
7.5 घंटे की मैराथन बहस के बाद मुहर; शादी, तलाक और लिव-इन के लिए अब पूरे राज्य में होंगे समान नियम
गांधीनगर/नई दिल्ली:
देश की राजनीति और सामाजिक सुधार की दिशा में आज एक बड़ा कदम उठाते हुए गुजरात विधानसभा ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल को बहुमत के साथ पारित कर दिया है। इसके साथ ही गुजरात, उत्तराखंड के बाद समान नागरिक संहिता लागू करने वाला देश का दूसरा राज्य बन गया है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने इस बिल को सदन में पेश किया, जिस पर करीब 7.5 घंटे तक लंबी और तीखी बहस चली।
खबर के मुख्य बिंदु (Key Highlights):
- समान अधिकार: यह कानून शादी, तलाक, विरासत, गोद लेने और संपति जैसे मामलों में सभी धर्मों और समुदायों के लिए एक समान नियम लागू करेगा।
- लिव-इन रिलेशनशिप पर सख्ती: अब लिव-इन में रहने वाले जोड़ों के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। रजिस्ट्रेशन न कराने पर सजा और जुर्माने का प्रावधान है।
- बहुविवाह पर रोक: नए कानून के तहत एक से अधिक विवाह (Polygamy) पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा।
- बेटियों को समान हक: पैतृक संपत्ति में बेटियों को बेटों के बराबर अधिकार सुनिश्चित किए गए हैं।
- विपक्ष का रुख: कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इस बिल का विरोध किया, हालांकि बहुमत सरकार के पक्ष में होने के कारण बिल आसानी से पास हो गया।
क्यों खास है यह कानून?
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने सदन में कहा कि यह बिल किसी धर्म के खिलाफ नहीं बल्कि महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा के लिए है। विशेष रूप से ‘हलाला’ जैसी कुरीतियों पर रोक और जबरन धर्म परिवर्तन या धोखाधड़ी से की गई शादियों के खिलाफ इसमें 7 साल तक की जेल का कड़ा प्रावधान रखा गया है।
आदिवासी समुदाय को राहत
उत्तराखंड की तर्ज पर गुजरात में भी अनुसूचित जनजाति (ST) को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है, ताकि उनकी पारंपरिक और सांस्कृतिक पहचान बनी रहे।
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