”हम ‘दलाल’ देश नहीं बन सकते” – पश्चिम एशिया संकट पर सर्वदलीय बैठक में गरजे विदेश मंत्री एस जयशंकर
पाकिस्तान की मध्यस्थता पर तीखा प्रहार; कहा- 1981 से अमेरिका का मोहरा बना है पड़ोसी देश

नई दिल्ली/भोपाल:
पश्चिम एशिया में ईरान और इजराइल-अमेरिका के बीच जारी भीषण युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर उपजे गंभीर संकट पर चर्चा के लिए बुधवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण सर्वदलीय बैठक बुलाई गई। संसद परिसर में हुई इस बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस जयशंकर और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी समेत विपक्ष के तमाम दिग्गज नेता मौजूद रहे।
पाकिस्तान की भूमिका पर जयशंकर का दो-टूक जवाब
सूत्रों के अनुसार, बैठक के दौरान जब विपक्षी नेताओं ने ईरान युद्ध में भारत की मध्यस्थता और पाकिस्तान की सक्रियता को लेकर सवाल उठाए, तो विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बेहद कड़े शब्दों में जवाब दिया। उन्होंने पाकिस्तान की मध्यस्थता की तुलना ‘दलाली’ से करते हुए कहा:
“हम पाकिस्तान की तरह ‘दलाल’ (Broker) देश नहीं हो सकते। पाकिस्तान जो कर रहा है उसमें कुछ नया नहीं है; 1981 से ही अमेरिका उसे ईरान के साथ बातचीत के लिए मोहरे के रूप में इस्तेमाल करता रहा है। भारत की अपनी स्वतंत्र विदेश नीति है और हम अपनी गरिमा से समझौता नहीं करेंगे।”
ऊर्जा सुरक्षा और प्रवासियों पर सरकार का भरोसा
बैठक में सरकार ने स्पष्ट किया कि युद्ध के बावजूद भारत की ऊर्जा सुरक्षा (पेट्रोल-डीजल और गैस आपूर्ति) पूरी तरह सुरक्षित है।
- गैस उत्पादन: सरकार ने बताया कि घरेलू गैस उत्पादन 20% से बढ़कर 60% हो गया है।
- रणनीतिक जीत: हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से भारत आने वाले तेल टैंकरों का सुरक्षित निकलना एक बड़ी कूटनीतिक जीत है।
- प्रवासी सुरक्षा: खाड़ी देशों में रह रहे करीब 1 करोड़ भारतीयों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
विपक्ष की मांग और एकजुटता
कांग्रेस सहित कुछ विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर संसद में विस्तृत चर्चा की मांग की। हालांकि, बैठक के अंत में सभी दलों ने राष्ट्रहित और वैश्विक संकट के इस दौर में सरकार के साथ एकजुट रहने का संकल्प दोहराया।



