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मिडिल ईस्ट संकट के बीच भारत का ‘मास्टरस्ट्रोक’, 8 साल बाद ईरान से खरीदी LPG; एमपी समेत देशभर में किल्लत होगी दूर

चीन जा रहा टैंकर भारत की ओर मुड़ा, रुपये में हुआ भुगतान; सरकारी तेल कंपनियों ने साझा किया 43,000 टन का कार्गो

नई दिल्ली/भोपाल:

देश में रसोई गैस की बढ़ती मांग और मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के कारण उपजे संकट के बीच भारत ने अपनी कूटनीतिक और व्यापारिक सूझबूझ का परिचय दिया है। रॉयटर्स और LSEG के डेटा के अनुसार, भारत ने 2018 के बाद पहली बार ईरान से एलपीजी का आयात किया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव के कारण वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई है।

चीन का माल अब भारत के पास

​रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरानी एलपीजी से लदा ‘अरोरा’ (Aurora) या ‘सी बर्ड’ (Sea Bird) नाम का टैंकर मूल रूप से चीन की ओर जा रहा था। भारत ने बीच रास्ते में ही एक ट्रेडर के जरिए इस सौदे को अंतिम रूप दिया और जहाज का रुख भारत की ओर मोड़ लिया। यह टैंकर जल्द ही कर्नाटक के मैंगलोर पोर्ट पर पहुंचने की उम्मीद है।

सौदा रुपये में: विदेशी मुद्रा की बचत

​इस ऐतिहासिक सौदे की सबसे बड़ी खासियत इसका भुगतान है। पश्चिमी देशों की पाबंदियों के बीच, भारत ने इस खेप के लिए भारतीय रुपये (INR) में भुगतान करने का फैसला किया है। इससे न केवल डॉलर पर निर्भरता कम होगी, बल्कि देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर भी दबाव नहीं पड़ेगा।

प्रमुख बिंदु और प्रभाव:

    • तीन कंपनियों का साझा कार्गो: लगभग 43,000 टन की इस खेप को देश की तीन बड़ी सरकारी तेल कंपनियां—इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) आपस में साझा करेंगी।
    • अमेरिका की ओर से मिली ढील: अमेरिका ने हाल ही में ईरान पर लगी पाबंदियों में 30 दिनों की अस्थायी छूट दी है, जिससे भारत के लिए यह रास्ता साफ हुआ।
    • मध्यप्रदेश पर असर: पिछले कुछ दिनों से एमपी के इंदौर, भोपाल और उज्जैन जैसे शहरों में एलपीजी की सप्लाई में कुछ देरी देखी जा रही थी। इस नई खेप के आने से राज्य में गैस वितरण व्यवस्था फिर से पटरी पर लौटेगी।
    • भविष्य की योजना: सूत्रों का कहना है कि भारत सरकार और तेल कंपनियां ईरान से और अधिक कार्गो खरीदने की संभावनाएं तलाश रही हैं ताकि घरेलू बाजार में स्थिरता बनी रहे।

विशेष नोट: भारत अपनी एलपीजी जरूरत का लगभग 60% हिस्सा आयात करता है, जिसमें से अधिकांश हिस्सा मिडिल ईस्ट के देशों से आता है। ईरान से व्यापार शुरू होना भारत के लिए एक बड़ा बैकअप प्लान साबित हो सकता है।

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