विपक्ष ने राष्ट्र के साथ किया घोर अन्याय: परिसीमन और महिला आरक्षण पर बोले सीएम चंद्रबाबू नायडू
लोकतांत्रिक ढांचे में विकास करने वाले राज्यों को दंडित करना दुर्भाग्यपूर्ण, संघीय संतुलन बचाने का अवसर खोया: आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री

अमरावती/भोपाल:
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और एनडीए के प्रमुख सहयोगी एन. चंद्रबाबू नायडू ने परिसीमन (Delimitation) और संवैधानिक संशोधन विधेयक को लेकर विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कांग्रेस, डीएमके (DMK), टीएमसी (TMC) और समाजवादी पार्टी (सपा) के रुख को राष्ट्रहित के विरुद्ध बताते हुए कहा कि इन दलों ने राजनीतिक एजेंडे के लिए देश के साथ ‘घोर अन्याय’ किया है।
मुख्यमंत्री नायडू ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अनुच्छेद 81 के तहत सीटों के पुनर्गठन पर लगी रोक 2026 के बाद समाप्त हो जाएगी। यदि इसके बाद सीटों का वितरण केवल जनसंख्या के आधार पर हुआ, तो दक्षिण भारत, उत्तर-पूर्वी राज्यों और छोटे राज्यों का संसदीय प्रतिनिधित्व काफी कम हो जाएगा, जो देश के संघीय संतुलन के लिए बड़ा खतरा है।
विकास करने वाले राज्यों को ‘सजा’ क्यों?
नायडू ने तार्किक सवाल उठाते हुए कहा कि जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण और आर्थिक विकास में बेहतर प्रदर्शन किया है, उन्हें लोकतांत्रिक ढांचे में प्रतिनिधित्व कम करके दंडित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा:
”एनडीए का प्रस्ताव इन राज्यों की आवाज़ की रक्षा करने और महिलाओं के लिए 33% आरक्षण सुनिश्चित करने का एक ईमानदार प्रयास था। दुर्भाग्यपूर्ण है कि दीर्घकालिक राष्ट्रीय हित के बजाय राजनीतिक स्वार्थ हावी हो गया।”
विपक्ष पर तीखे वार
नायडू ने विपक्षी दलों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस फैसले का जश्न मनाने वालों को आत्मनिरीक्षण करना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि निष्पक्ष प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने का एक बड़ा अवसर खो दिया गया है। उनके अनुसार, ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाने और राज्यों के बीच संतुलन बनाने की कोशिशों को विपक्ष ने बाधित किया है।
क्या है मुख्य विवाद?
- अनुच्छेद 81 का प्रभाव: 2026 के बाद होने वाले परिसीमन में उत्तर भारत की सीटें (जहाँ जनसंख्या अधिक है) बढ़ने और दक्षिण भारत की सीटें कम होने की संभावना है।
- संघीय ढांचा: दक्षिण भारतीय राज्यों को डर है कि उनकी राजनीतिक ताकत कम हो जाएगी।
- महिला आरक्षण: सरकार परिसीमन के साथ ही महिला आरक्षण को प्रभावी ढंग से लागू करने की योजना पर काम कर रही थी।
यह बयान आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति में परिसीमन के मुद्दे पर एक बड़ी बहस को जन्म दे सकता है।
ब्यूरो रिपोर्ट, टुडे इंडिया न्यूज़




