MP विधानसभा का विशेष सत्र: 27 अप्रैल को ‘नारी शक्ति वंदन’ पर होगा महामंथन, सियासी पारा चढ़ना तय
"क्रेडिट वॉर" की तैयारी में पक्ष-विपक्ष; 33% आरक्षण के मुद्दे पर सदन में छिड़ेगी तीखी बहस

भोपाल | टुडे इंडिया न्यूज़
मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने 27 अप्रैल को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर मास्टरस्ट्रोक खेल दिया है। ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के समर्थन में संकल्प पारित करने के बहाने सरकार अपनी महिला हितैषी छवि को और मजबूत करना चाहती है। हालाँकि, विपक्ष ने भी स्पष्ट कर दिया है कि वह केवल “हाँ में हाँ” मिलाने के लिए सदन में नहीं बैठेगा।
खबर के मुख्य बिंदु:
- ऐतिहासिक सत्र: 27 अप्रैल को होने वाले इस एक दिवसीय सत्र में महिला आरक्षण को लेकर राज्य की भूमिका तय होगी।
- नगर निगमों का साथ: भोपाल नगर निगम द्वारा प्रस्ताव पास किए जाने के बाद अब ग्वालियर, इंदौर और जबलपुर जैसे निकायों में भी इसकी तैयारी तेज है।
- विपक्ष की रणनीति: कांग्रेस ने संकेत दिए हैं कि वे इस चर्चा में ‘OBC आरक्षण’ और ‘तत्काल लागू करने’ की मांग को लेकर सरकार को घेरेंगे।
नेताओं की जुबानी: वार-पलटवार
“महिला सशक्तिकरण केवल भाषणों का मुद्दा नहीं, बल्कि हमारे संकल्प का प्रमाण है। 27 अप्रैल को विधानसभा का यह सत्र पूरे देश को संदेश देगा कि मध्य प्रदेश अपनी मातृशक्ति के साथ मजबूती से खड़ा है।”
— डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री
“हम नारी शक्ति वंदन का स्वागत करते हैं, लेकिन यह केवल चुनावी इवेंट बनकर न रह जाए। सरकार बताए कि प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर लगाम कब लगेगी? अगर मंशा साफ है, तो आरक्षण को तुरंत लागू करने की बात सदन में हो।”
— उमंग सिंघार, नेता प्रतिपक्ष
विवाद का मुख्य केंद्र?
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि सदन में गरमागरम बहस केवल आरक्षण पर नहीं, बल्कि इसके समय (Timing) पर होगी। विपक्ष यह मुद्दा उठा सकता है कि जब केंद्र से कानून बन चुका है, तो विधानसभा में विशेष सत्र बुलाना क्या केवल एक राजनीतिक औपचारिकता है या 2028 के चुनाव की तैयारी?
टुडे इंडिया न्यूज़ के लिए भोपाल से ब्यूरो रिपोर्ट।




