गृह मंत्री अमित शाह पर विवादित टिप्पणी का मामला: राहुल गांधी की बढ़ी मुश्किलें, विशेषाधिकार हनन का नोटिस जारी
संसद में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ बिना सबूत आरोप लगाने पर कार्रवाई; लोकसभा सचिवालय ने 28 अगस्त तक मांगा जवाब।

टुडे इंडिया न्यूज एमपी
नई दिल्ली / भोपाल (टुडे इंडिया न्यूज एमपी):
संसद के मानसून सत्र में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लेकर की गई तीखी और विवादित टिप्पणियों के मामले में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। राहुल गांधी को लोकसभा सचिवालय ने विशेषाधिकार हनन (Breach of Privilege) और सदन की अवमानना का नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
लोकसभा सचिवालय ने राहुल गांधी को भाजपा सांसदों द्वारा दी गई शिकायतों की प्रति संलग्न करते हुए 28 अगस्त तक अपना आधिकारिक स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
क्या है पूरा मामला?
संसद में ‘पेपर लीक संशोधन विधेयक’ (Public Examination Amendment Bill) पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने भाषण देते हुए गृह मंत्री अमित शाह और सरकार पर सीधे आरोप लगाए थे। भाजपा का आरोप है कि राहुल गांधी ने गृह मंत्री के खिलाफ बिना पूर्व सूचना दिए और बिना किसी ठोस साक्ष्य के गंभीर व बेबुनियाद आरोप लगाए, साथ ही असंसदीय शब्दावली का प्रयोग किया।
राहुल गांधी के इस भाषण पर सत्ता पक्ष ने कड़ा एतराज जताया था। इसके बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री व भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर और पार्टी के मुख्य सचेतक (Chief Whip) संजय जायसवाल ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के समक्ष विशेषाधिकार हनन का नोटिस सौंपा था।
भाजपा सांसदों की शिकायत में प्रमुख बिंदु
- नियमों का उल्लंघन: सांसद अनुराग ठाकुर ने शिकायत में कहा कि राहुल गांधी ने लोकसभा नियम 352 का स्पष्ट उल्लंघन किया है।
- निराधार आरोप: नेता प्रतिपक्ष ने बिना किसी प्रमाण के गृह मंत्री पर गंभीर आरोप लगाए और सदन की गरिमा को ठेस पहुंचाई।
- माफी की मांग: भाजपा सांसदों ने मांग की है कि इस मामले को विशेषाधिकार समिति (Privileges Committee) के पास भेजा जाए और राहुल गांधी को सदन व गृह मंत्री से बिना शर्त माफी मांगने का निर्देश दिया जाए।
आगे क्या होगी कानूनी व संसदीय प्रक्रिया?
”संसदीय नियमों (Rule 222) के अनुसार, किसी सदस्य पर बिना अग्रिम सूचना और बिना साक्ष्य के गंभीर व्यक्तिगत आरोप लगाना सदन के विशेषाधिकार का हनन माना जाता है।”
लोकसभा सचिवालय द्वारा जारी नोटिस के बाद अब राहुल गांधी को निर्धारित समय-सीमा (28 अगस्त) तक अपना लिखित पक्ष रखना होगा। उनके जवाब के आधार पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला यह तय करेंगे कि मामले को विशेषाधिकार समिति को जांच के लिए भेजा जाए या इसे समाप्त किया जाए। यदि मामला समिति के पास जाता है, तो राहुल गांधी को समिति के समक्ष उपस्थित होकर अपनी सफाई देनी पड़ सकती है




