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निवाड़ी नगर परिषद में बड़ा फर्जीवाड़ा! CM के नाम पर वाहवाही लूटने के लिए ढका ₹2.44 करोड़ का शिलालेख
CMO और इंजीनियर पर लगे बिना सहमति फोटो व राजनीतिक चिह्न इस्तेमाल करने के आरोप; पार्षद ने मांगा जवाब।

टुडे इंडिया न्यूज़ एमपी
निवाड़ी/भोपाल :-
निवाड़ी नगर परिषद में शिलालेख ढंकने पर विवाद: पूर्व लोकार्पित भवन को दोबारा लोकार्पण में शामिल करने की कोशिश, पार्षद ने खोला मोर्चा
₹2.44 करोड़ की लागत से बने भवन के मूल शिलालेख पर कागज चिपकाने और बिना सहमति बैनर-होर्डिंग में फोटो व राजनीतिक चिन्ह लगाने का आरोप, निष्पक्ष जांच व कोर्ट जाने की चेतावनी।
मुख्य बिंदु एवं मामला
- स्थान व निकाय: नगर परिषद कार्यालय भवन, निवाड़ी (मध्य प्रदेश)।
- शिकायतकर्ता: गजेंद्र राय (पार्षद, वार्ड क्रमांक 05, नगर परिषद निवाड़ी)।
- शिकायत की तिथि: 17 अगस्त 2026 (मुख्य नगर पालिका अधिकारी को प्रेषित पत्र)।
- निर्माण लागत: ₹244.00 लाख (₹2.44 करोड़)।
विवाद के मुख्य कारण और आरोप
- मूल शिलालेख को ढंकना: 22 जुलाई 2026 तक नगर परिषद कार्यालय भवन में ₹2.44 करोड़ की लागत का मूल लोकार्पण शिलालेख (जिस पर तत्कालीन जनप्रतिनिधियों, पार्षदों, CMO एवं उपयंत्री के नाम अंकित थे) लगा हुआ था। वर्तमान में उस शिलालेख को पूरी तरह सफेद कागज से ढंक दिया गया है।
- पुनः लोकार्पण का षड्यंत्र: आरोप है कि पूर्व में लोकार्पित हो चुके इस भवन को 26 जुलाई 2026 को माननीय मुख्यमंत्री के निवाड़ी कार्यक्रम के दौरान पुनः लोकार्पण सूची में जोड़ने का प्रयास किया गया, ताकि अधिकारी प्रशासनिक वाहवाही लूट सकें।
- अधिकारियों की राजनीतिक निष्पक्षता पर सवाल: 26 जुलाई के कार्यक्रम हेतु नगर में पार्षद की बिना सहमति के फोटो के साथ भारतीय जनता पार्टी का चुनाव चिन्ह “कमल” लगाकर होर्डिंग/बैनर लगाए गए, जिनमें “सौजन्य” में CMO एवं इंजीनियर के नाम अंकित थे।
- जनप्रतिनिधियों के सम्मान को ठेस: आरोप है कि निकाय निधि से बने भवन के मूल शिलालेख से पुराने जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों के नाम हटाकर वर्तमान अधिकारियों के नाम दर्ज कराने के उद्देश्य से यह षड्यंत्र रचा जा रहा है।
पार्षद द्वारा की गई मुख्य मांगें
- तत्काल प्रभाव से ढक्कन हटाना: मूल शिलालेख से कागज हटाकर उसे पूर्ववत सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया जाए।
- आदेश व स्पष्टीकरण की मांग: शिलालेख को ढंकने/हटाने का लिखित आदेश किसने जारी किया, उसकी प्रामाणित प्रति उपलब्ध कराई जाए।
- पुनः लोकार्पण का औचित्य: पूर्व में लोकार्पित भवन को 26 जुलाई 2026 के मुख्यमंत्री कार्यक्रम में पुनः लोकार्पण हेतु शामिल करने का औचित्य व प्रस्ताव की जानकारी दी जाए।
- राजनीतिक विज्ञापनों पर कार्रवाई: बिना सहमति फोटो और राजनीतिक दल के चिह्न का उपयोग करने वाले दोषी अधिकारियों के विरुद्ध निष्पक्ष जांच कर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
- कानूनी कार्रवाई की चेतावनी: यदि शिलालेख को तत्काल पूर्ववत नहीं किया गया, तो मामले को माननीय न्यायालय के समक्ष ले जाया जाएगा।




