बड़ी राहत: खाड़ी युद्ध के बीच सरकार का मास्टरस्ट्रोक, कमर्शियल गैस का कोटा बढ़ाकर किया 70%
होटल, ढाबों और फैक्ट्रियों में फिर लौटेगी रौनक; घरेलू रसोई गैस की सप्लाई रहेगी बरकरार

नई दिल्ली/भोपाल:
पश्चिमी एशिया (खाड़ी देशों) में जारी युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर गैस सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। इसका सीधा असर भारत के कमर्शियल सेक्टर पर पड़ रहा था, जहां गैस की भारी किल्लत देखी जा रही थी। इस संकट को भांपते हुए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने होटलों, ढाबों और कारखानों के लिए कमर्शियल एलपीजी (LPG) का कोटा अब 50% से बढ़ाकर 70% कर दिया है।
ठप पड़े उद्योगों को मिलेगी नई गति
पिछले कुछ हफ्तों से कमर्शियल गैस की कमी के कारण कई लघु उद्योग और खान-पान से जुड़े व्यवसाय बंद होने की कगार पर थे। सरकार के इस फैसले से:
- श्रम-प्रधान उद्योग: स्टील, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल और प्लास्टिक जैसे उद्योगों को प्राथमिकता मिलेगी।
- व्यवसाय: होटल और ढाबों को अब सुचारू रूप से गैस मिल सकेगी, जिससे काम की रफ्तार फिर से बढ़ेगी।
- रोजगार: ठप पड़े काम शुरू होने से लाखों मजदूरों और कर्मचारियों के रोजगार पर मंडरा रहा खतरा टल जाएगा।
आम जनता के लिए ‘सुकून’ की खबर
सरकार ने स्पष्ट किया है कि कमर्शियल कोटा बढ़ाने का घरेलू रसोई गैस (Domestic LPG) की आपूर्ति पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। आम नागरिकों के घरों में इस्तेमाल होने वाले सिलेंडरों की सप्लाई पहले की तरह ही सामान्य बनी रहेगी। सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि आम आदमी के किचन का बजट और सप्लाई प्रभावित न हो।
क्यों पैदा हुआ यह संकट?
ईरान और अन्य खाड़ी देशों के बीच युद्ध के कारण हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे प्रमुख समुद्री मार्ग बाधित हुए हैं। भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का लगभग 60% आयात करता है, जिसका बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आता है। सप्लाई में इसी रुकावट को देखते हुए सरकार ने वैकल्पिक व्यवस्थाएं और कोटा आवंटन में बदलाव किया है।
“सरकार का मुख्य उद्देश्य उद्योगों को मंदी से बचाना और साथ ही घरेलू उपभोक्ताओं को सुरक्षित रखना है। 70% कोटा आवंटन से बाजार में स्थिरता आएगी।”
— पेट्रोलियम मंत्रालय के आधिकारिक सूत्र
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