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​निवाड़ी में ‘बत्ती गुल’: याद आया दिग्गी राजा का दौर, क्या फिर लालटेन के युग में लौट रहा है जिला?

अघोषित विधुत कटौती से त्रस्त निवाड़ी: सत्तापक्ष की बेरुखी और विपक्ष की चुप्पी के बीच त्रस्त हुई जनता; विकास के दावों की खुली पोल।

निवाड़ी।

मध्य प्रदेश का सबसे छोटा और ‘वीआईपी’ माना जाने वाला निवाड़ी जिला इन दिनों भीषण बिजली कटौती की मार झेल रहा है। जिले की बदहाल विद्युत व्यवस्था ने आम जनमानस को पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के उस 10 साल के कार्यकाल की याद दिला दी है, जिसे भाजपा अक्सर ‘अंधेरा युग’ कहकर कोसती रही है। विडंबना देखिए, आज जिले में हालात ऐसे हैं कि निवाड़ी शहर, जिला मुख्यालय कम और सुविधाओं के अभाव में कोई छोटा पिछड़ा गांव ज्यादा नजर आता है।

घोषित-अघोषित कटौती से जनजीवन अस्त-व्यस्त

​पिछले कुछ दिनों से निवाड़ी में बिजली की लुकाछिपी का खेल जारी है। भीषण गर्मी और उमस के बीच घंटों तक बिजली गायब रहना अब आम बात हो गई है। व्यापार ठप है, बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और पेयजल आपूर्ति पर भी इसका सीधा असर पड़ रहा है। हैरानी की बात यह है कि विद्युत विभाग के पास इस समस्या का न तो कोई ठोस कारण है और न ही समाधान।

जिम्मेदारों की ‘रहस्यमयी’ खामोशी

​इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात स्थानीय नेतृत्व और प्रशासनिक अधिकारियों की चुप्पी है।

    • अधिकारी: बिजली कटौती पर शिकायत करने पर तकनीकी खामियों का बहाना बनाकर पल्ला झाड़ लेते हैं।
    • सत्तापक्ष: विकास के बड़े-बड़े दावे करने वाले नेता अब जनता के बीच जाने से कतरा रहे हैं।
    • विपक्ष: लोकतंत्र का प्रहरी कहा जाने वाला विपक्ष भी इस गंभीर मुद्दे पर मौन साधे बैठा है, जिससे जनता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है।

​”हम जिला मुख्यालय में रहते हैं या किसी सुदूर गांव में, समझ नहीं आता। कहने को हम जिला बन गए हैं, लेकिन सुविधाएं 20 साल पुराने मध्य प्रदेश जैसी हैं।”

स्थानीय निवासी

 

टुडे इंडिया न्यूज की पड़ताल: मौन क्यों है विपक्ष?

​आमतौर पर छोटे-छोटे मुद्दों पर धरना-प्रदर्शन करने वाले विपक्षी दल इस बार बिजली जैसे बुनियादी मुद्दे पर शांत क्यों हैं? यह सवाल निवाड़ी की गलियों में गूंज रहा है। क्या नेताओं और अधिकारियों के बीच कोई ‘मौन सहमति’ है, या फिर जनता की तकलीफें अब चुनावी मुद्दा नहीं रहीं?

निष्कर्ष:

अगर जल्द ही बिजली आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले समय में जनता का यह आक्रोश सड़कों पर नजर आ सकता है। निवाड़ी को जिला बनाना तभी सार्थक होगा जब उसे जिले जैसी बुनियादी सुविधाएं भी मिलें।

रिपोर्ट: ब्यूरो चीफ, टुडे इंडिया न्यूज एमपी (निवाड़ी)

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